भारतीय दम्पत्तियों में बांझपन(इनफर्टिलिटी) की समस्या के पीछे की वजह क्या है
बढ़ते समय के साथ लोगों की जीवनशैली में तेजी से बदलाव आया है, लेकिन बदलाव से गुजरती इस दुनिया में एक चीज जिसने लोगों को प्रभावित किया है वो है आज के जेनरेशन के लोगों में इनफर्टिलिटी की शिकायत। रिपोर्ट की माने तो आज के समय में करीब 27.5 मिलीयन कपल्स ऐसे हैं जो इनफर्टिलिटी की समस्या से जुझ रहे हैं। जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, देश में यह दिक्कत और भी ज्यादा व्यापक होती गई है। इस समस्या ने पुरुष और महिला को समान रुप से प्रभावित किया है। आमतौर पर आज जब लोग शादी करते हैं तो वो पहले फैमिली प्लानिंग करते हैं, लेकिन इनमें से 54% कपल्स के साथ, बाद में गर्भधारण करने में समस्या आने लगती है। अगर आपके परिवार में भी कोई इनफर्टिलिटी से गुजर रहा है तो गुड़गांव में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Gurgaon) में इलाज करवा सकते हैं।
भारतीय दम्पत्तियों में बांझपन(इनफर् टिलिटी) की समस्या के पीछे कारण क्या है? (Reasons behind infertility issues in Indian couples)
शीर्ष आईवीएफ केंद्र (Top IVF Centre) के डॉक्ट र की माने तो इनफर्टिलिटी की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे महिला प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाना, या महिला गर्भपात की समस्या से जुझ रही हो या फिर शरीर में विटामीन की कमी होना, इन सभी कारणों से एक महिला को इनफर्टिलिटी से जुझना पड़ता है। इसके अलावा विटामीन की कमी से पुरुष में शुक्राणु संबंधी समस्या पाई जाती है। ऐसे कई कारण हैं जिससे एक कपल्स को इनफर्टिलिटी की समस्या से जुझना पड़ता है।
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आइए कारणों को जानते हैं, और साथ में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ केंद्र (Best IVF Centre) के बारे में जहां पर इसका इलाज हो सके।
- फैलोपियन ट्यूब बंद या क्षतिग्रस्त होना – अगर फैलोपियन ट्यूब बंद हो या क्षतिग्रस्त हो तो ऐसे में इनफर्टिलिटी की समस्या पैदा हो जाती है क्योंकि इसके बंद या क्षतिग्रस्त होने से अंडे गर्भाशय तक नहीं पहुंचते हैं। जिसकी वजह से महिला के लिए गर्भधारण कर पाना मुश्किल हो जाता है।
- शुक्राणु से जुड़ी समस्या – शुक्राणु की समस्या सीधे तौर पर फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। शुक्राणु संख्या और गुणवत्ता दोनों के कमी होने के कारण आपकी साथी गर्भधारण नहीं कर पाती है। शुक्राणु से जुड़ी समस्या विटामीन डी की कमी से होती है। विटामीन की कमी से शुक्राणु के साथ-साथ टेस्टोस्टेरोन भी अपने निम्न स्तर पर आ जाता है।
- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) – इस समस्या से ग्रसीत होने के बाद सीधे तौर पर हार्मोन की क्षति होती है। पीसीओएस सीधे तौर पर हार्मोन को क्षति पहुंचाता है, जिसकी वजह से अनियमीत मासिक धर्म, मुंहासे और इनफर्टिलिटी जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।
- विटामीन की कमी – विटामीन की कमी से भी महिलाओं को प्रजनन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। फास्ट फुड के इस जमाने में कोई भी प्रोटीन और विटामीन जैसे तत्वों को ध्यान में रखकर किसी चीज का सेवन करता है। हर किसी को टेस्टी फास्ट फुड चाहिए, जो हर किसी के स्वास्थ्य पर सीधे असर करता है। विटामीन की कमी को सीधे तौर पर बांझपन और प्रजनन समस्याओं से जोड़ा गया है। विटामीन की कमी सिर्फ महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरुषओं को भी समान रूप से प्रभावित करती है।
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- ओवेरियन कैंसर – ओवेरियन कैंसर से ग्रसीत होने के बाद इनफर्टिलिटी, गर्भपात और गर्भधारण सभी पर असर पड़ने लगता है। ओवेरियन कैंसर एक महिला के श्राप के तरह होता है, इस रोग का इलाज करवाते-करवाते प्रजनन कोशिकाओं का पूरी तरह से खत्म हो जाने का डर रहता है। कीमोथेरेपी और सर्जरी जैसे उपचार प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
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निष्कर्ष
निष्कर्ष के तौर पर, भारतीय जोड़ों में बांझपन की समस्या के लिए विभिन्न कारकों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जैसे कमजोर महिला प्रजनन क्षमता, शुक्राणु संबंधी समस्याएं, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), विटामिन की कमी और डिम्बग्रंथि कैंसर जैसी स्थितियां। जीवनशैली, खान-पान की आदतें और स्वास्थ्य पर ध्यान न देना भी बांझपन पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ केंद्र में उपचार लेने से जोड़ों को इन बाधाओं को दूर करने और परिवार शुरू करने के अपने सपने को पूरा करने में मदद मिल सकती है। इन कारकों पर ध्यान देना और प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार और सफलतापूर्वक गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए सक्रिय उपाय करना महत्वपूर्ण है।
बांझपन(इनफर्टिलिटी) आज के समय में समस्या नहीं है क्योंकि इन समस्या को दूर करने का और भी तरीके उपलब्ध है। लेकिन हमें ये बात समझनाृी होगी कि हमारे अंदर इनफर्टिलिटी की समस्या हमारे द्वारा की गई गलतीयों का परीमाण है। आज हर छठा कपल इनफर्टिलिटी समस्या का सामना कर रहा है। सुविधाओं, उपचार की गुणवत्ता, कर्मचारियों और विशेषज्ञों के अनुभव के साथ-साथ दिल्ली में आईवीएफ लागत (IVF Cost in Delhi) के आधार पर आपको एक उचित निर्णय लें।