गर्भधारण के लिए संघर्ष कर रहे हैं? इन प्रजनन परीक्षणों से गुजरने की संभावना पर विचार करें
घर में बच्चे की किलकारी हर मां-बाप के लिए एक सुखद पल होता है, लेकिन आज भी कई ऐसे जोड़े हैं जो इस पल के लिए मोहताज हैं। भारत में हर साल करीब 20 लाख जोड़े बांझपन और गर्भपात जैसी समस्या से जुझते हैं। वजह साफ है, तेजी से बदलती इस दुनिया में इंसान तनाव और चिंता के घेरे में आने के बाद अपनी गतिहीन जीवनशैली में कब गंदी आदतें (धूम्रपान और शराब) को शुमार कर लेता है किसी को पता नहीं चलता। और इसका सीधा प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसके अलावा गर्भधारण न कर पाने का एक कारण शारीरिक गतिविधि की कमी भी है, जैसे व्यायाम और योगा न करना। और इस तरह की समस्या सिर्फ महिला के वजह से नहीं पुरुष के वजह से भी हो सकता है। अगर आप गर्भधारण के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो आपको प्रजनन परीक्षणों के बारे में विचार करना होगा। इसके साथ ही दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (best IVF center in Delhi) के बारे में जानेंगे, जहां आप प्रजनन परीक्षण के लिए जा सकते हैं।
क्या है प्रजनन परीक्षण?
जब एक महिला बार-बार गर्भधारण करने में विफल हो या फिर उसे गर्भपात की समस्या का सामना करना पड़ रहा हो तो ऐसे में निदान के तौर पर महिला का प्रजनन परीक्षण किया जाता है। इस परीक्षण की मदद से महिला में बांझपन की समस्या का कारण पता लगाया जाता है, जिसके बाद उस समस्या के अनुसार से इलाज किया जाता है ताकी महिला सफलतापूर्वक गर्भधारण कर सके। युनाइटेड नेशन के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रजनन दर साल-दर-साल कम होती जा रही है।
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प्रजनन परीक्षण के लिए सही समय कब है?
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कौन-कौन से प्रजनन परीक्षण उपलब्ध हैं, और परीक्षण प्रक्रिया
- फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन(एफएसएच) टेस्ट – इस buy addyi online in the best USA pharmacy https://4naturalwellness.com/wp-content/uploads/2025/09/html/buy-addyi.html no prescription with fast delivery drugstoreटेस्ट के माध्यम से पता लगाया जाता है कि रक्त में कूप-उत्तेजक हार्मोन की मात्रा क्या और कितनी है? रक्त में कूप-उत्तेजक हार्मोन होने से ओवेरियन कूप विकास को बढ़ाने का काम करती है। एफएसएच के हाई होने से डिम्बग्रंथि रिजर्व में गिरावट का संकेत आने लगते हैं, जो की चिंता का विषय है।
- एएमएच(एंटी-मुलरियन हार्मोन) टेस्ट – इस टेस्ट की मदद से रक्त में मौजुद एएमएच मात्रा को मापा जाता है। पुरुषों और महिलाओं में एएमएच का निर्माण अंडकोष और अंडाशय द्वारा होता है, जिसकी मदद से ग्रंथियां, शुक्राणु और हार्मोन बनती है।
- एलएच(ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) टेस्ट – ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन आपके रक्तप्रवाह में रासायनिक संदेशवाहक के तौर पर काम करता है। ये कुछ कोशिकाओं या अंगों की गतिविधियों को नियंत्रित भी करता है। एलएच बच्चों में यौन विकास और वयस्कों में प्रजनन क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- टीएसएच(थायराइड-उत्तेजक हार्मोन) टेस्ट – टीएसएच के असंतुलित होने पर इसका सीधा असर ओव्यूलेशन, मासिक धर्म चक्र गर्भावस्था और प्रजनन पर पड़ता है। इसके अलाव टीएसएच परीक्षण का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि आपका थायराइड कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है।
- एसआईएस(सलाइन इन्फ्यूजन सोनोग्राम) टेस्ट – इस परीक्षण की मदद से गर्भाशय के अंदर देखा जा सकता है। यह एक सुरक्षित तरीका है, गर्भाश्य के अंदर की दिक्कतों को जानने के लिए बेहद ही कारगर विकल्प है। इस प्रक्रिया में चित्र बनाने के लिए ध्वनि तरंगों और कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। इसमें विकिरण(रेडिएशन) का उपयोग नहीं होता है।
निष्कर्ष
समय के साथ गर्भधारण न कर पाना अब समस्या नहीं है, समस्या है कि सही वजह को जानना की जिससे गर्भधारण कर पाना मुश्किल हो रहा है। आज विज्ञान के चमत्कार से यह भी मुमकिन है लेकिन एक बात जो ध्यान में रखने की जरूरत है वो यह है कि समय रहते अगर उपचार करा लिया तो ठीक है वर्ना बढ़ते समय के साथ गर्भधारण कर पाना और मुश्किल हो जाता है। अच्छी बात यह है कि महिला बिना किसी मेडिकल सहायता के 37 वर्ष की आयु तक मां बन सकती हैं और इसकी 78% संभावना है।
अगर आप भी ऐसी किसी समस्या से जूझ रहे हैं और आपको समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें तो इसका इलाज गुड़गांव के आईवीएफ सेंटर (IVF center in Gurgaon) में उपलब्ध है।
अगर आप भी ऐसे दिक्कत का सामना कर रहे हैं और आपको समझ नहीं आ रहा है क्या करना है तो आईवीएफ सेंटर (IVF center) में इसका इलाज उपलब्ध है।