गर्भावस्था के लिए आवश्यक अंडाशय का आकार क्या है?
अंडाशय एक महिला के जीवन में अहम किरदार निभाता है, अंडाशय का आकार एक महिला के लिए कई मायने में अहम होता है। अंडाशय का आकार प्रजनन प्रणाली से लेकर गर्भावस्था के स्वास्थ्य तक हरेक चीज को संदर्भित करता है। गर्भधारण क
अंडाशय की परीभाषा
अंडाशय छोटी और अंडाकार आकार की ग्रंथियां होती हैं जो आपके गर्भाशय के दोनों तरफ स्थित होती हैं। मादा ग्रंथियों की जोड़ी में से एक में अंडे का निर्माण होता हैं और दूसरे में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनते हैं। यह हार्मोन महिला लक्षणों जैसे स्तन का विकास, शरीर का आकार और शरीर पर आने वाले बाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। इसके साथ मासिक धर्म चक्र, प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था में भी शामिल होता है।
गर्भावस्था के लिए आवश्यक अंडाशय का आकार क्या है?
एक अंडाशय का औसतन सामान्य आकार 3.5cmx2.5cmx1.5cm होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है अंडाशय में अंडों की संख्या घटने लगती है और मासिक धर्म चक्र के बाद भी अंडे का आकार भी घटने लगता है। हम सभी जानते हैं कि जितना अधिक अंडो का भंडार होगा, अंडाशय का आकार उतना ही बड़ा होगा। और गर्भावस्था के लिए आवश्यक अंडाशय का आकार जितना बड़ा हो उतना बेहतर होता है।
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अंडाशय के आकार में परिवर्तन का कारण
उम्र – उम्र के हिसाब से अंडाशय का आकार बदलता रहता है, सरल भाषा में कहें तो उम्र के अनुसार अंडाशय का आकार अलग-अलग होता है। जैसे – अंडाशय का औसतन आकार यौवन से पहले छोटी होती है। जैसे-जैसे लड़की युवावस्था की उम्र में प्रवेश करती है, आकार बढ़ने लगता है और गर्भावस्था के दौरान अपने अधिकतम आकार में होता है। अंडाशय के आकार में परिवर्तन का कारण बनने वाले कुछ स्थापित वजह इस तरह से हैं, जिसमें से उम्र, गर्भावस्था, ओवेरियन संबंधी विकार और शरीर में होने वाले हार्मोनल उत्तेज
ओवेरियन संबंधी विकार – ओवेरियन कैंसर और पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) जैसे रोग अंडाशय का आकार बढ़ा देते हैं। पीसीओएस के कारण अनियमित मासिक चक्र और पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होता है, और ऐसे रोग से ग्रसीत महिला को गर्भधारण कर पाने में असमर्थता होती है। ओवेरियन कैंसर से ग्रसीत होने के बाद अंडाशय का आकार बढ़ जाता है, और इस तरह से ओवेरियन संबंधी विकार अंडाशय के आकार में परिवर्तन का कारण बनता है। अगर कोई ओवेरियन संबंधी विकार से जुझ रहे हैं तो दिल्ली में आईवीएफ लागत (IVF Cost in Delhi) आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
बांझपन का इलाज – जिन महिलाओं में बांझपन की समस्या होती है, उनको निदान के तौर पर प्रजनन उपचार करवाना होता है। महिला को अपने अंडाशय का उत्पादन और अंडे निर्माण और जारी करने के लिए हार्मोनल उत्तेजना का इंजेक्शन दिया जाता है। ऐसी स्थिति में अंडाशय के आकार में वृद्धि हो जाती है। हालांकि, यह क्षणिक है और गर्भावस्था की मांग होती है, अंडाशय में वृद्धि 1 या 2 महीने में ठीक हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान अंडाशय का आकार बढ़ जाता है। दिल्ली के शीर्ष आईवीएफ केंद्र (Top IVF Centre in Delhi) में आप बांझपन का इलाज करवा सकती हैं।
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अंडाशय और अंडे को स्वस्थ बनाने के सर्वोत्तम उपाय।
फिट जीवन – भारतीय महिलाओं में यह देखा गया है कि जैसे ही वो शादी करती है उसके कुछ समय के बाद उनका वजन अप्राकृतिक रूप से बढ़ने लगता है। जो की समस्या का घर है, अधिक वजन होने से कई समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए कोशिश करें की आप फिट रह सकें और फिट जीवन ही जीयें।
रोज व्यायाम करें – हम सभी जानते हैं कि व्यायाम के अपने ही फायदे हैं। योग या फिर व्यायाम रोज करने से आप सकारात्मकता और ऊर्जा से भरपूर रहते हैं। रोज व्यायाम आपको स्वस्थ रखने के साथ-साथ रोग-विकार से भी दूर रखता है।
स्वस्थ खाना का सेवन करें – फास्ट फुड के इस जमाने में हमें विटामिन और प्रोटीन से भरे खाने के तरफ फोकस करना चाहिए, क्योंकि फास्ट फुड का सेवन किसी दिन आपको रोगी बना सकता है। और हाल के समय में एक रिसर्च से पता चला है कि फास्ट फुड ज्यादा सेवन से हार्ट अटैक भी होते हैं।
निष्कर्ष
आम भाषा में कहें तो अंडाशय का आकार किसी भी महिला के प्रजनन स्वास्थ्य और गर्भधारण दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण होता है। अंडाशय का औसतन सामान्य आकार 3.5cmx2.5cmx1.5cm है, और उम्र के साथ ये बदलता रहता है। ऐसे बहुत से कारक हैं जो अंडाशय के आकार को नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे उम्र, ओवेरियन संबंधी विकार और प्रजनन उपचार। अंडाशय और अंडे को स्वस्थ्य रखने के लिए, यह जरूरी है कि आप अपने फिट जीवनशैली को बनाये रखें, साथ में रोज व्यायाम या योग करें और पौष्टिक आहार का सेवन करें। यह आदतें प्रजनन संबंधी दिक्कतों को रोकने और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं। अगर आपको प्रजनन संबंधी समस्या से जुझ रहे हैं तो दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ केंद्र (Best IVF Centre in Delhi) से आप परामर्श ले सकते हैं।

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