एएमएच हार्मोन क्या है? जानिए कैसे यह प्रजनन स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभा सकता है
हमारे शरीर में प्रजनन अंग के विकास के पीछे एएमएच यानी एंटी-मुलरियन हार्मोन अहम किरदार निभाता है। एंटी-मुलरियन हार्मोन परीक्षण की मदद से हमारे रक्त में मौजुद एंटी-मुलरियन हार्मोन के स्तर के बारे में जान पाते हैं। एएमएच स्तर मापने से विभिन्न प्रकार की प्रजनन स्वास्थ्य स्थितियों के बारे में पता चलता है। एएमएच को मुलेरियन इनहिबिटिंग हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है। एएमएच पुरुष और महिलाओं में अलग-अलग तरीके से काम करता है। पुरुषों में, एएमएच का निर्माण अंडकोष की मदद से होता है, जो की ग्रंथियां, शुक्राणु और पुरुष हार्मोन बनाने में भी मददगार साबित होती है। महिलाओं में, अंडाशय का निर्माण एएमएच की मदद से होता है। अंडाशय ग्रंथियों में अंडे बनते हैं और महिला हार्मोन भी बनता है। अगर आप प्रजनन स्वास्थ्य की समस्या से जुझ रहे हैं तो दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Delhi) में इलाज करवा सकते हैं।
एएमएच हार्मोन क्या है
(What is AMH hormone?)
एंटी-मुलरियन हार्मोन बच्चों में यौन अंगो के विकास के लिए जिम्मेदार माना जाता है। एएमएच पेट में पल रहे शिशुओं में, नर और मादा प्रजनन अंगों के निर्माण में मदद करता है। अजन्मे शिशुओं का लिंग उनके माता-पिता से विरासत में मिले क्रोमोसाम द्वारा तय होता है। नर शिशुओं में XY और मादा शिशुओं में XX क्रोमोसाम होते हैं। लेकिन उनके प्रजनन अंगों और जननांगों का विकास एएमएच सहित हार्मोन से प्रभावित होता है।
गर्भावस्था के शुरुआती दौर में, नर और मादा दोनों शिशुओं में ट्यूबों का एक सेट होता है, जिसे मुलेरियन ट्यूब कहते हैं। नर शिशुओं में एएमएच का स्तर अधिक होता है। एएमएच, मुलेरियन ट्यूब को सिकुड़ाता है और पुरुष के अंगों को बढ़ने में मदद करता है। मादा शिशुओं में एएमएच का स्तर बहुत कम होता है। एएमएच, मुलेरियन ट्यूब को गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और योनि के ऊपरी हिस्से में विकसित होने की अनुमति देता है।
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आइए जानते हैं दिल्ली में शीर्ष आईवीएफ सेंटर (Top IVF center in Delhi) के बारे में, और दिल्ली में आईवीएफ लागत (IVF Cost in Delhi) क्या है?
इसका उपयोग किस लिए होता है?
(What is it used for?)
आमतौर पर जब महिला इनफर्टिलिटी की समस्या से गुजर रही होती है तो अन्य परीक्षण के साथ-साथ एएमएच परीक्षण का भी उपयोग किया जाता है। अगर आप इनफर्टिलिटी का इलाज करवा रही हैं तो, एएमएच परीक्षण से आपको निम्न चीजों के बारे में पता चलता है:
- आपके अंडाशय में कितने अंडे बचे हैं(how many eggs are left in your ovaries) – इसे “ओवेरियन रिजर्व” कहते हैं। बढ़ते उम्र के साथ आपके ओवेरियन रिजर्व का कम होना एक सामान्य घटना है। एएमएच परीक्षण से आप ओवेरियन रिजर्व का आकार के बारे में जान पाते हैं, लेकिन यह आपको अंडों के स्वास्थ्य के बारे में नहीं बता सकता है और नाही यह अनुमान लगा पाता है कि आप गर्भवती हो सकती हैं या नहीं।
- एएमएच प्रजनन चिकित्सा प्रदान करने में मदद करता है(AMH helps provide fertility therapy) – आमतौर पर प्रत्येक महिने में निषेचन के लिए अंडाशय एक अंडा तैयार करता है। लेकिन अगर आप आईवीएफ का इस्तेमाल करके बच्चे पैदा करना चाहती हैं तो, डॉक्टर आपके फर्टिलाइजेशन को मद्देनजर रखते हुए आपको स्वस्थ रखने और अंडाशय की क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रजनन दवा लिखता है। फर्टिलाइजेशन के लिए दवा बताने से पहले, आपके एएमएच स्तर का परीक्षण किया जाता है, जिससे आपके डॉक्टर को यह जानने में मदद मिलती है कि अंडाशय के क्षमता को बढ़ाने के लिए कौन-सी प्रजनन दवा बेहतर साबित हो सकती है। अंडाशय की क्षमता बढ़ाने के मतलब है, अंडाशय में अंडो की संख्या का बढ़ना।
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ओवेरियन रोग और बांझपन में एंटी-मुलरियन हार्मोन (एएमएच) की भूमिका
(Role of Anti-Müllerian Hormone (AMH) in Ovarian Disease and Infertility)
ओवेरियन रोग में ओवेरियन कैंसर या फिर पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) जैसी दिक्कतें देखने के लिए मिलती है। बात करें ओवेरियन कैंसर की तो इस रोग से ग्रसीत होने के बाद इनफर्टिलिटी की शिकायत का डर रहता है। क्योंकि ओवेरियन कैंसर में कीमोथेरेपी और सर्जरी जैसे इलाज प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, और एएमएच परीक्षण आपको ओवेरियन रिजर्व के बारे में बता सकता है लेकिन आप मां बनेगी या नहीं इसका पता नहीं चलता है। पीसीओएस में आपको अनियमित मासिक धर्म, मुहांसे और बालों के झड़ने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।
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निष्कर्ष (Conclusion)
एएमएच हार्मोन जिसका काम हमारे प्रजनन स्वास्थ्य और यौन अंगो का विकास करना है। इस हार्मोन का इस्तेमाल चिकित्सकीय उपयोग में किए जाने की काफी संभावनाएं हैं, खासकर आईवीएफ जैसे उपचार के क्षेत्र में। हालांकि, एएमएच का अधिक स्पष्ट उपयोग मुख्य रूप से अविश्वसनीय निदान से बाधित होता है। एएमएच हार्मोन प्रजनन के लिए सहायक हार्मोन है, इसकी मदद से आप जान सकते हैं कि किसी भी महिला के मां बनने का चांस कितना है। एक बार के लिए कह सकते हैं कि एएमएच ही तय करता है कि अजन्मे बच्चे का लिंग क्या होने वाला है।
सरल शब्दों में, एंटी-मुलरियन हार्मोन (एएमएच) एक हार्मोन है जो पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन अंगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पुरुषों में अंडकोष और महिलाओं में अंडाशय द्वारा निर्मित होता है। रक्त में एएमएच स्तर को मापकर, डॉक्टर विभिन्न प्रजनन स्वास्थ्य स्थितियों का पता लगा सकते हैं। बांझपन का सामना कर रही महिलाओं में, एएमएच परीक्षण डिम्बग्रंथि रिजर्व निर्धारित करने और आईवीएफ जैसे प्रजनन उपचार का मार्गदर्शन करने में मदद कर सकता है। इसके अतिरिक्त, एएमएच परीक्षण डिम्बग्रंथि के कैंसर और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) जैसे डिम्बग्रंथि रोगों की पहचान करने में फायदेमंद है, जो उचित चिकित्सा हस्तक्षेप के माध्यम से प्रजनन क्षमता में सुधार करने में मदद करता है।