आईवीएफ प्रक्रिया में ज्यादा अंडे क्यों बनाते हैं?
सहायक प्रजनन उपचार में आईवीएफ सबसे सफल और इस्तेमाल किया जाने वाला उपचार विकल्प है। आईवीएफ ने अभी लाखों इनफर्टिलिटी से जुझ रहे कपल्स को संतानप्राप्ती का सुख प्रदान किया है, और निसंतान कपल्स के लिए एक उम्मीद की तरह उभरा है। लेकिन आईवीएफ में होने वाले कुछ प्रक्रिया को लेकर लोगों में एक असमंजस की स्थिति होती है, और वो लोग प्रक्रिया को लेकर किसी-न-किसी संशय में रहते हैं। उनका संशय होता है कि आईवीएफ प्रक्रिया में ज्यादा अंडे क्यों बनाते हैं? अगर आप भी आईवीएफ उपचार के बारे में सोच रहे हैं तो दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF Center in Delhi) मददगार साबित होगा।
आईवीएफ प्रक्रिया को चरण-दर-चरण परफॉर्म किया जाता है, और हरेक बढ़ता हुआ चरण गर्भावस्था को मुमकिन बनाने के तरफ एक सफल कदम की तरह होता है। ऐसे में अंडो की संख्या को बढ़ाने वाला प्रक्रिया, आईवीएफ उपचार की पहली और अहम चरण होती है। आमतौर पर, एक महिला अपने मासिक धर्म चक्र के दौरान एक अंडे को ओव्यूलेट करती है, लेकिन यहां पर सवाल होता है कि फिर उपचार के लिए अत्यधिक अंडे क्यों चाहिए। आइए जानते हैं आईवीएफ प्रक्रिया में ज्यादा अंडे क्यों बनाते हैं?
प्राकृतिक मासिक धर्म चक्र बनाम आईवीएफ चक्र(The Natural Menstrual Cycle vs. IVF Cycle)
प्राकृतिक मासिक धर्म चक्र – जैसा कि हमने आपको ऊपर भी बताया है कि मासिक धर्म चक्र के दौरान एक महिला एक ही परिपक्व अंडे को रिलीज करती है। दरअसल, मासिक धर्म के शुरूआती दौर में ओवेरी मल्टीपल फॉलिकल्स को उत्पादित करती है, लेकिन हार्मोनल सिग्नलिंग यह सुनिश्चित करता है कि ओव्यूलेशन के दौरान एक हि परिपक्व अंडो को रिलीज करती है। आपको बता दें कि अंडे को निषेचित होने के लिए जरूरी हो जाता है कि अंडे परिपक्व हों।
आईवीएफ चक्र – हालांकि, आईवीएफ के लिए परिपक्व अंडो की ही जरूरत पड़ती है, लेकिन उपचार प्रक्रिया में एक से अधिक अंडो की जरूरत पड़ती है। जिसके कारण आईवीएफ उपचार के दौरान अंडे को रिलीज करने की शरीर की प्राकृतिक चयन प्रक्रिया को खत्म करने और एक साथ कई अंडों के विकास और रिलीज को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस प्रक्रिया को मेडिकल टर्म में डिम्बग्रंथि उत्तेजना कहते हैं, इस प्रक्रिया में हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल करके मल्टीपल अंडो को रिलीज करने के लिए डिम्बग्रंथि को उत्तेजीत किया जाता है।
क्यों किया जाता है अधिक अंडो को पैदा(Why are more eggs produced?)
आईवीएफ उपचार के दौरान अधिक अंडो को पैदा करने के पीछे कई तरह के कारक और तकनीक जुड़े होते हैं, जिसके कारण आईवीएफ में अधिक अंडो की जरूरत पड़ती है। कारक और तकनीक निम्नलिखित हैः
निषेचन की संभावनाओं को अधिकतम करना(Maximizing Fertilization Chances) – अंडो के निषेचित होने के लिए जरूरी है कि अंडे परिपक्व हों। ऐसे में डिम्बग्रंथि उत्तेजना की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद जब अंडा पुनर्प्राप्ति की जाती है तो जरूरी नहीं कि सभी अंडे उचित और परिपक्व हो। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि आईवीएफ में अधिक अंडो को प्राप्त किया जाए, ताकी उनमें से कुछ परिपक्व अंडे भी प्राप्त हो सकें। सरल शब्दों में कहें तो, सेब से भरी एक टोकरी जिसमें कुछ कच्चे, कुछ पके हुए, कुछ बड़े और कुछ छोटे साइज के सेब हैं, और आप खाने के लिए पके हुए सेब को चुनते हैं।
भ्रूण चयन(Embryo Selection) – अब जब परिपक्व अंडो को चुनाव हो जाता है, और फिर लैब में अंडो और शुक्राणु को निषेचित करके भ्रूण को तैयार किया जाता है। लेकिन तैयार किए गए भ्रूणों के साथ एक समस्या रहती है, समस्या जैसे – सभी भ्रूण व्यवहार्य नहीं होते हैं। व्यवहार्य नहीं होने का मतलब है आनुवंशिक असामान्यताएं, खराब विकास या विखंडन कुछ भ्रूणों को स्थानांतरण या फ्रीजिंग के लिए अनुपयुक्त बना सकता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि तैयार किए गए भ्रूणों की संख्या अधिक हो, और अधिक भ्रूणों की संख्या का मतलब है अत्यधिक अंडो का होना।
भावी परिवार नियोजन(Future Family Planning) – भ्रूणों की संख्या अधिक होने का मतलब है कि आप भविष्य के लिए परिवार नियोजन कर सकते हैं। अगर आप भविष्य में बच्चे की इच्छा रखते हैं, तो आपके पास विकल्प है कि आप भ्रूण को फ्रीज कर सकते हैं। ऐसा करने से भविष्य आपकी महिला पार्टनर को डिम्बग्रंथि उत्तेजना और अंडा पुनर्प्राप्ति प्रक्रियाओं को स्किप करने का विकल्प मिल जाता है। और जब आपकी इच्छा हुई तो फ्रीज किए गए भ्रूण का इस्तेमाल करके संतानप्राप्ती कर सकते हैं। इस तरह की स्थिति को मद्देनजर रखते हुए उपचार में अधिक अंडो को कंसीडर किया जाता है।
क्षय के लिए क्षतिपूर्ति(Compensating for Attrition) – आईवीएफ प्रक्रिया में स्वाभाविक रूप से कुछ हद तक कपल्स के लिए घर्षण शामिल होता है। यह जरूरी नहीं है कि अंडा पुनर्प्राप्ति से प्राप्त किए गए सभी अंडे परिपक्व ही होंगे। इसके साथ ही सभी परिपक्व अंडे जरूरी नहीं कि निषेचित होंगे, और अगर निषेचित हो भी जाते हैं तो जरूरी नहीं कि निषेचित भ्रूण व्यवहार्य ब्लास्टोसिस्ट में विकसित होंगे। और इस तरह की स्थिति घर्षण को पैदा करती है। अगर आप संतानप्राप्ती के लिए आईवीएफ उपचार कराना चाहते हैं, तो दिल्ली में आईवीएफ लागत (IVF Cost in Delhi) आपके लिए किफायती होगा।
आयु-संबंधित गिरावट को संबोधित करना(Addressing Age-Related Decline) – प्रजनन क्षमता को लेकर एक बात बहुत ही साफ है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे ही प्रजनन क्षमता प्रभावित होने लगती है। इसके साथ ही आईवीएफ उपचार के लिए उम्र एक अहम कारक होता है, ऐसे में अगर कोई महिला अत्यधिक उम्र में आईवीएफ उपचार करवाना चाहती हैं तो जरूरी हो जाता है कि अधिक अंडो को प्राप्त किया जाए। क्योंकि बढ़ते उम्र के साथ अंडो का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ही प्रभावित होने लगती है।
निष्कर्ष(Conclusion)
इस बात में कोई शक नहीं है कि आईवीएफ उपचार में अधिक अंडो को प्राप्त करने पर फोकस किया जाता है, लेकिन इस तरह की फोकस कई बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है। अंडो के निषेचित होने के लिए जरूरी होता है कि अंडे परिपक्व हों। हालांकि, आईवीएफ उपचार के दौरान अंडा पुनर्प्राप्ति के बाद कई तरह की समस्या होती है, जैसे – प्राप्त किए गए सभी अंडे परिपक्व नहीं होंगे, सभी परिपक्व अंडे निषेचित नहीं होंगे, और सभी निषेचित भ्रूण व्यवहार्य ब्लास्टोसिस्ट में विकसित नहीं होंगे। इस तरह की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उपचार में अधिक अंडो की आवश्यकता होती है। अगर आप भी आईवीएफ उपचार के बारे में सोच रहे हैं तो दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Delhi) मददगार साबित होगा।
पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र.1. आईवीएफ में एकाधिक अंडों की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर – आईवीएफ में एकाधिक अंडों की आवश्यकता निषेचन और सफल भ्रूण विकास की संभावना बढ़ाने के लिए किया जाता है। जरूरी नहीं है कि सभी अंडे निषेचित होंगे, और सभी निषेचित अंडे स्वस्थ भ्रूण में विकसित होंगे।
प्र.2. आईवीएफ चक्र में आम तौर पर कितने अंडे प्राप्त किए जाते हैं?
उत्तर- बात करें आईवीएफ चक्र में आम तौर पर प्राप्त अंडो की संख्या कि तो प्राप्त अंडों की संख्या उम्र, डिम्बग्रंथि रिजर्व और उत्तेजना प्रोटोकॉल जैसे कारकों के अनुसार भिन्न हो सकता है। अंडा पुनर्प्राप्ति के मानक के अनुसार आईवीएफ चक्र में औसतन 8-15 अंडे प्राप्त किए जाते हैं।
प्र.3. क्या अधिक अंडे पैदा करने से गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है?
उत्तर- आप ऐसा कह सकते हैं, क्योंकि अधिक अंडे पैदा करने से व्यवहार्य भ्रूण मिलने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, अंडे और भ्रूण की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अंडो की अधिक मात्रा सफलता की गारंटी नहीं देती बल्कि अवसर को बेहतर करने का मौका प्रदान करती है।
प्र.4 उन अतिरिक्त भ्रूणों का क्या होता है जिनका उपयोग नहीं किया जाता?
उत्तर – भविष्य में आईवीएफ प्रयासों या परिवार नियोजन के लिए अतिरिक्त भ्रूण को फ्रीज (क्रायोप्रिजर्व्ड) किया जा सकता है। कहने का मतलब है कि अगर आप भविष्य में एक और बच्चे के बारे में सोच रहे हैं तो अतिरिक्त भ्रूण को फ्रीज करवा सकते हैं।
प्र.5. क्या डिम्बग्रंथि उत्तेजना मेरे अंडाशय को नुकसान पहुंचा सकती है?
उत्तर – जब एक अनुभवी प्रजनन विशेषज्ञ द्वारा सावधानीपूर्वक प्रबंधन किया जाता है, तो डिम्बग्रंथि उत्तेजना आम तौर पर सुरक्षित होती है। हालांकि, अत्यधिक उत्तेजना से डिम्बग्रंथि हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम (ओएचएसएस) हो सकता है, जिसके लिए निगरानी और, दुर्लभ मामलों में, उपचार की आवश्यकता होती है।