आईवीएफ में प्रजनन दवाओं की क्या भूमिका है?(The role of fertility medicines in IVF, in Hindi)

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दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF centre in Delhi) द्वारा प्रकाशित सवालो की सुची में पाया गया है कि आईवीएफ के लिए आए कपल्स सवालों से भरे होते हैं, और कहीं-न-कहीं यह जाहिर-सी बात हैं। क्योंकि बदलाव या आविष्कार को समझने में समय लगता है, ऊपर से आईवीएफ टर्म भी लोगों के लि ए नया है। हालांकि, कपल्स द्वारा सबसे ज्यादा पूछे ज ाने वाला सवाल है – आईवीएफ में प्रजनन दवाओं की क्या भूमिका है? इस तरह के सवाल यह बताने के लिए काफी है कि जनता अभी भी आईवीएफ उपचार विकल्प से अनभिज्ञ है।

इस लेख में जानेंगे आईवीएफ में प्रजनन दवाओं की क्या भूमिका है?

क्या है आईवीएफ(What is IVF)

इससे पहले कि हम जानें आईवीएफ में प्रजनन दवाओं की भूमिका को, उससे पहले हमें समझना होगा कि आईवीएफ क्या है? जिसके बाद आपके लिए समझना आसान हो जाएगा कि इस उपचार विकल्प में दवाओं की क्या जरूरत, और उन दवाओं की भूमिका के बारे में। आईवीएफ प्रजनन उपचार विकल्प है, जिसके मदद से बांझपन ग्रसीत कपल्स को संतानप्राप्ती का सुख मिलता है। लेकिन इस उपचार विकल्प कि प्रक्रिया में कई चीजें शामिल होती है, और इस उपचार की प्रक्रिया को हि समझ पाना कपल्स के लिए जटिल होता है।

इस उपचार प्रक्रियाओं के पूरा होने के लिए जरूरी होता है कि प्रजनन दवाओं का सहारा लिया जाए, जैसे – उपचार में मल्टीपल परिपक्व अंडो की जरूरत होती है और इसके लिए डिम्बग्रंथि को प्रजनन दवाओं के मदद से उत्तेजित किया जाता है, ताकी ओव्यूलेशन के दौरान एक अधिक अंडे रिलीज हो। हरेक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए भी प्रजनन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही अगर बांझपन की समस्या के बारे में समय से पता चल जाता है तो समस्या पर काबू पाने के लिए भी प्रजनन दवाओं का ही सहारा लिया जाता है।  

आईवीएफ प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण(Initial stages of IVF process)

आईवीएफ प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण के तौर पर आता है – डिम्बग्रंथि उत्तेजना, जैसा कि हमने आपको ऊपर उदाहरण के तौर पर बताया कि एक से अधिक अंडो की चाह के कारण डिम्बग्रंथि को प्रजनन दवाओं के मदद से उत्तेजित किया जाता है। इन दवाओं में फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच) और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) शामिल हैं, जो दोनों डिम्बग्रंथि फॉलिकल्स के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हालांकि, इस तरह की दवाओं के कारण ओव्यूलेशन समय से पहले भी हो सकता है, और ऐसे में समय से पहले ओव्यूलेशन को रोकने के लिए महिला को गोनाडोट्रोपिन-रिलीज़िंग हार्मोन (जीएनआरएच) एगोनिस्ट या एंटागोनिस्ट भी दिया जाता है। और यह सबकुछ प्राकृतिक ओव्यूलेशन को पुश करने के लिए किया जाता है, ताकी अंडे को निषेचन के लिए इष्टतम समय मिल सके। और फिर अंडो को पुनः प्राप्त किया जा सके।

प्रजनन दवाओं का असर(Effect of Fertility drugs)

उपचार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और प्रजनन दवाओं के असर को जानने के लिए अहम हो जाता है कि इस पर निगरानी रखी जाए। इस दौरान दवाओं के असर का मूल्यांकन करने के लिए रक्त परीक्षण और अल्ट्रासाउंड का सहारा लिया जाता है। इस वक्त पर आपके डॉक्टर दवाओं के असर को मद्देनजर रखते है, सकारात्मक प्रक्रिया पर आवश्यकतानुसार खुराक को समायोजित करने की अनुमति प्रदान करता है। इसलिए प्रजनन दवाओं के असर को ट्रैक करना, और उसपर निगरानी अहम हो जाता है। इसके साथ ही ट्रैक करने का लक्ष्य प्रजनन दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, डिम्बग्रंथि हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम (ओएचएसएस) के जोखिम को कम करते हुए परिपक्व अंडों की संख्या को अनुकूलित करना भी होता है।

अंडा पुनर्प्राप्ति से पहले ट्रिगर शॉट(Trigger Shot before Egg Retrieval)

दिल्ली के शीर्ष आईवीएफ सेंटर(Top IVF Centres in Delhi) के अनुसार, अल्ट्रासउंड के मदद से फॉलिकल्स के विकास को ट्रैक करने पर, अब क्योंकि फॉलिकल्स परिवक्व हो गए हैं तो महिला के शरीर को ओव्यूलेशन के लिए तैयार किया जाता है, ताकी अंडा पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया को पूरा किया जा सके। इस तैयारी में महिला को ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) का इंजेक्शन दिया जाता है, जिसे मेडिकल टर्म में “ट्रिगर शॉट” कहते हैं। जो ओव्यूलेशन को ट्रिगर करने वाले प्राकृतिक एलएच उछाल की नकल करता है। 

आईवीएफ प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए प्रजनन दवाओं का सहारा लिया जाता है, और इसमें भी ट्रिगर शॉट का इस्तेमाल होता है। और एक सच यह भी है कि इस तरह के दवाएं दिल्ली में आईवीएफ दर(IVF Rate in Delhi) को प्रभावित करने का काम करता है।

गर्भावस्था का मुमकिन होना(Possibility of Pregnancy)

अंडा पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया के बाद परिपक्व अंडो का चयन करके, लैब में भ्रूण को तैयार किया जाता है। भ्रूण को तैयार करने से पहले पुरूष पार्टनर से शुक्राणु को संग्रहीत किया जाता है, फिर अंडो और शुक्राणु को निषेचन करके भ्रूण को तैयार किया जाता है। भ्रूण को तैयार होने में करीब 3-5 दिन का समय़ लगता है, और जब एक बार भ्रूण तैयार हो जाता है तो उसके व्यावहार्य और गुणवत्ता को जांचा जाता है। आपको बता दें कि दिल्ली में आईवीएफ लागत (IVF Cost in Delhi) आपके लिए किफायती साबित होगा।

भ्रूण की जांच के साथ-साथ गर्भाशय का वातावरण की जांच भी की जाती है कि वो भ्रूण के लायक है, या नहीं। अगर गर्भाशय में किसी तरह की समस्या पाया जाता है तो उसे भ्रूण के लायक बनाया जाता है। अब जब भ्रूण और गर्भाशय दोनों ही एक-दूसरे के लिए उचित हो चुके हैं तो अब बारी आती उपचार प्रक्रिया की सबसे अहम चरण की आती – भ्रूण स्थानांतरण। भ्रूण को गर्भाशय में आरोपित किया जाता है, ताकी भ्रूण अपने शैल से बाहर निकलकर गर्भाशय की दीवार से प्रत्यारोपित हो सके। इसके बाद आपको 10-14 दिन तक इतंजार करने के लिए कहा जाता है, और इस अवधि के बाद आप प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकते हैं।

निष्कर्ष(Conclusion)

आईवीएफ में प्रजनन दवाओं की क्या भूमिका है? तो आपको बता दे कि आईवीएफ उपचार की प्रक्रियाओं के पूरा होने के लिए इन प्रजनन दवाओं का अहम भुमिका होता है। जैसे – डिम्बग्रंथि उत्तेजना में, अंडा पुनर्प्राप्ति और हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए। हालांकि, इन दवाओं का सेवन नकारत्मक प्रभाव न दिखाये या फिर इसके असर को जानने के लिए ट्रैक किया जाता है। इसके साथ ही अल्ट्रासाउंड और रक्त परिक्षण के मदद दवाओं के प्रभाव को जाना जाता है। दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF centre in Delhi) के अनुसार प्रजनन दवाओं का मूल्यांकन डॉक्टर को मौका प्रदान करता है कि वो दवाओं के डोज को बढ़ा या घटा सकते हैं।   

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र.1. आईवीएफ में कभी-कभी प्रजनन संबंधी दवाओं का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर – आपको बता दें कि आईवीएफ उपचार में प्रजनन दवाओं का इस्तेमाल कई उद्देश्य के साथ किया जाता है। आईवीएफ की प्रक्रियाओं का पूरा होने के लिए प्रजनन दवाओं का सहारा लिया है। जैसे – अंडा पुनर्प्राप्ति में अधिक अंडो को प्राप्त करने के लिए प्रजनन दवाओं के मदद से डिम्बग्रंथि को उत्तेजित किया जाता है।       

प्र.2. आईवीएफ के लिए दवाएं क्या करती हैं?

उत्तर- आईवीएफ उपचार में दवाएं प्रजनन संबंधी समस्या में अहम रोल निभाता है। सरल शब्दों में कहें तो आईवीएफ उपचार के प्रारंभीक प्रक्रियाओं में प्रजनन दवाएं भी शरीर के अंदर में बदलाव का कारण बनती है। आमतौर पर, मासिक धर्म के दौरान एक महिला एक हि अंडा ओव्यूलेट करती हैं, लेकिन उपचार के दौरान प्रजनन दवाओं के मदद से अंडो की संख्या को बढ़ाया जाता है।

प्र.3. क्या आप प्रजनन दवाओं के बिना आईवीएफ कर सकते हैं?

उत्तर – आपको बता दें कि आईवीएफ उपचार की स्थिति कई बातों पर निर्भर करती है। अगर आपका प्रजनन स्वास्थ्य बेहतर है तो आपको प्राकृतिक रूप से संतानप्राप्ती का सुझाव दिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद अगर आप आईवीएफ उपचार के लिए जाते हैं तो शायद बिना किसी दवा के उपचार किया जा सकता है। लेकिन आपको बता दें कि बिना प्रजनन दवाओं के आईवीएफ उपचार शुन्य हो जाता है।      

प्र.4. प्रजनन दवाएं शरीर में कितने समय तक रहती हैं?

उत्तर – अगर आप आईवीएफ उपचार के लिए जा रहे हैं, तो आपको प्रजनन दवाओं का सेवन करना पड़ेगा। बात करें कितने समय तक शरीर में रहता है तो आपको बता दें कि एचसीजी, जैसे दवा शरीर में 10 दिन तक रहते हैं।     

प्र.5. क्या आईवीएफ के मल्टीपल चक्र के लिए जाना सुरक्षित है?

उत्तर – आपको बता दें कि आईवीएफ के मल्टीपल चक्र के लिए जाना किसी का शौक नहीं होता है। चक्रों के विफल होने के कारण ही इस तरह के निर्णय लिए जाते हैं, और इस बात में कोई शक नहीं है कि आईवीएफ मल्टीपल चक्र सुरक्षित है। जिन कपल्स को पहली बार में सफलता नहीं मिलता है, उन लोगों के लिए यह जरूरी हो जाता है।

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