भ्रूण स्थानांतरण क्या है? इसके बाद होने वाले लक्षण(What is embryo transfer in Hindi)
हलचल से भरे दिल्ली के दिल में एक ऐसी जगह भी है, जिसने परिवार शुरू करने के इच्छुक अनगिनत जोड़ों के सपनों और आशाओं को संजोने का काम किया है, और इस जगह का नाम बेबी जॉय आईवीएफ(Baby Joy IVF) सेंटर है। दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Delhi) में से एक इस आईवीएफ सेंटर ने हजारों कपल्स के संतानप्राप्ती का सपना पूरा किया है। ऐसे में जो भी कपल बेबी जॉय आईवीएफ में आते हैं तो प्रजनन उपचार(Fertility Treatment) को लेकर संशय में रहते हैं, और उनका सवाल होता है कि भ्रूण स्थानांतरण क्या है? इसके बाद होने वाले लक्षण क्या हैं। भ्रूण स्थानांतरण आईवीएफ के अंतर्गत आने वाली प्रक्रिया है।
अध्याय 1: शुरुआत(Chapter 1: The Beginning)
एक कपल को जब पता चलता है कि वो बांझपन की समस्या से ग्रसीत हैं, तो उनके लिए चीजों को समझ पाना मुश्किल होता है। और ऐसे में संतानप्राप्ती के लिए कपल्स के पास प्रजनन उपचार का विकल्प बचता है। संघर्ष की यह शुरुआती दौर है, जिसमें उन सेवाओं के तरफ देखने लगते हैं, जिसके बारे में आप ने कभी सुना होगा। जैसे – आईवीएफ उपचार(IVF Treatment) और अन्य प्रजनन उपचार के बारे में। एक सच यह भी है कि इस वक्त पर कपल्स अक्सर गुगल से दिल्ली में आईवीएफ केंद्र (IVF Center in Delhi) को ढुढ़ने का काम करते हैं। अगर आप आईवीएफ उपचार करवाना चाहती हैं, तो दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Delhi) में से एक बेबी जॉय आईवीएफ सेंटर आपके लिए उचित साबित होगा।
अध्याय 2: पहला परामर्श(Chapter 2: The First Consultation)
ऐसे में आप समस्या और उसके इलाज को सही तरीके से जानने के लिए आईवीएफ सेंटर(IVF Center) में जाने को तय करते हैं। आप ने इसके लिए बेबी जॉय आईवीएफ सेंटर को चुना है, और जैसे ही आप सेंटर के परिसर में प्रवेश करते हैं तो आपका स्वागत एक शांत माहौल में किया गया जो पेशेवर और आरामदायक दोनों था। जब पहली बार में कोई कपल परामर्श के लिए जाता है तो उसके मन में कई तरह के सवाल होते हैं, और चेहरे पर कंफ्युजन भी देखने के लिए मिलता है।
ऐसे में कपल्स को शांती, डॉक्टर से बात करके ही मिलती है, और जैसे-जैसे उनको अपने सवालों के जवाब मिलता है तो वो उपचार को लेकर सहज महसूस करते हैं। डॉक्टर भी कपल्स की व्यथा को सुनते हैं, और फिर उनके चिकित्सा इतिहास की समीक्षा की, और प्रारंभिक परीक्षणों की एक श्रृंखला आयोजित की जाती है। जिसके रिजल्ट के अनुसार ही यह तय होगा कि समस्या का कारण क्या है, और किस प्रजनन उपचार के मदद से गर्भावस्था को मुमकिन बनाया जा सकता है।
अध्याय 3: भ्रूण स्थानांतरण को समझना(Chapter 3: Understanding Embryo Transfer)
अब जब कपल्स की स्थिति के अनुसार आईवीएफ उपचार को तय किया जाता है, तो कपल्स उपचार की प्रक्रिया को जानने के लिए उत्सुक होते हैं। ऐसे में डॉक्टर भी उपचार प्रक्रिया के बारे में बताते हैं कि आईवीएफ उपचार की प्रक्रिया चरण-दर-चरण होती है। इसमें सबसे अहम प्रक्रिया भ्रूण को तैयार करना और भ्रूण स्थानांतरण होता है। हालांकि, भ्रूण स्थानांतरण प्रक्रिया को समझने के लिए कई बार कपल्स को समय लग जाता है। लेकिन भ्रूण स्थानांतरण उतनी भी जटिल प्रक्रिया नहीं है, जितना कपल्स इसे समझने में समय लगाते हैं।
अध्याय 4: प्रक्रिया(Chapter 4: The Procedure)
भ्रूण स्थानांतरण से पहले पूरी प्रक्रिया को समझते हैं, आईवीएफ प्रक्रियाएं शुरु होती है – ओवेरि स्टीमुलेशन से – जिसमें अंडो की संख्या को बढ़ाने के लिए ओवेरि को उत्तेजित किया जाता है। फिर एक बार जब फॉलिकल्स बढ़कर परिपक्व अंडो में तब्दील हो जाते हैं, तो अंडा पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया की बारी आती है। महिलाओं से अंडो को एकत्रीत करने के बाद पुरूष पार्टनर से शुक्राणु को संग्रहीत किया जाता है, और भ्रूण को तैयार करने के लिए दोनों लैब में निचेषित किया जाता है। लैब में निषेचन की प्रक्रिया से भ्रूण को तैयार करते हैं, और भ्रूण के तैयार हो जाने के बाद उसके व्यवहार्य को जांचा जाता है। अगर भ्रूण में किसी भी तरह की कमी नहीं पाई जाती है, तो उपचार प्रक्रिया की आखीरी चरण को परफॉर्म किया जाता है – भ्रूण स्थानांतरण।
भूण स्थानांतरण में भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है, जिसके बाद भ्रूण अपने शैल से बाहर निकलकर 10-14 दिनों के अंतराल में भ्रूण गर्भाशय की दीवार के साथ प्रत्यारोपित होता है। और गर्भावस्था को मुमकिन बनाता है। भ्रूण स्थानांतरण के लिए जरूरी होता है कि गर्भाशय का वातावरण भ्रूण का समर्थन कर सके। हालांकि, कुछ कपल्स के अनुसार दिल्ली में आईवीएफ दर(IVF Rate in Delhi) अधिक होता है, लेकिन उन्हें समझना होगा कि दिल्ली में आईवीएफ लागत(IVF cost in Delhi) एक कोर्सपैक की तरह होता है, जिसमें एक ही लागत में आपको एक से अधिक सेवाएं प्रदान की जाती है।
अध्याय 5: प्रतीक्षा का खेल(Chapter 5: The Waiting Game)
जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि एक बार जब भ्रूण को स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो फिर 10-14 दिन समय लगता है, जिसमें भ्रूण गर्भाशय की दीवार के साथ प्रत्यारोपित होता है। इस दौरान हरेक बढ़ते दिन के साथ आपको अलग-अलग लक्षणों को अनुभव कर सकती हैं। इस दौरान एक महिला मतली, उल्टी, हल्की ऐंठन और स्तन कोमलता जैसी लक्षणों को देखने के लिए मिल सकता है। और थोड़ा और समय निकलने के बाद आपको स्पॉटिंग इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। लेकिन इस तरह के लक्षणों को एक सकारात्मक संकेत के तौर पर काउंट किया जाता है।
निष्कर्ष(Conclusion)
दरअसल, भ्रूण स्थानांतरण आईवीएफ की सबसे अंतिम और अहम प्रक्रिया होती है, और ये भ्रूण का गर्भाशय में आरोपण ही है, जो गर्भावस्था को मुमकिन बनाने का काम करता है। भ्रूण स्थानांतरण के बाद सबसे जरूरी होता है कि भ्रूण अपने शैल से बाहर निकलकर गर्भाशय की दीवार से प् रत्यारोपित हो जाए। ऐसा होने के बाद ही गर्भावस्था मुमकिन होता है, और अगर गर्भाशय का वातावरण भ्रूण के प्रति कम सपोर्टिव हुआ तो यह विफल आईवीएफ चक्र के तौर पर काउंट होता है। ऐसे में कई बार भ्रूण को स्थानांतरित करने से पहले उसके शैल को पतला भी किया जाता है, ताकी गर्भावस्था हर संभव रूप मुमकिन हो सके।
पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र.1. असफल प्रत्यारोपण के लक्षण क्या हैं?
उत्तर – सही मायनो में कहा जाए तो असफल प्रत्यारोपण के लक्षण नहीं होते हैं, बल्कि सफल प्रत्यारोपण के ही लक्षण होते हैं। जैसे – प्रत्यारोपण अगर सफल होते है तो स्तन कोमल और पेट में ऐंठन का अनुभव हो सकता है। लेकिन अगर प्रत्यारोपण असफल होता है तो आपको इसमें से कोई भी लक्षण नहीं दिखेगा।
प्र.2. भ्रूण प्रत्यारोपण के शारीरिक लक्षण क्या हैं?
उत्तर- भ्रूण प्रत्यारोपण के शारीरिक लक्षणों की बात करें तो आप पायेंगे कि मतली, उल्टी, स्तन कोमल, रक्तस्राव और पेट में ऐंठन की समस्या दिखने लगता है। और इन्हीं लक्षणों को शारीरिक लक्षणों के तौर पर काउंट किया जाता है।
प्र.3. कैसे पता चलेगा कि भ्रूण स्थानांतरण सफल है ?
उत्तर – यह जानने के लिए भ्रूण स्थानांतरण सफल हुआ है या नहीं, कई संकेत होते हैं जो आपको बताते हैं कि प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है। जैसे – इंप्लांटेशन ब्लीडिंग, जिसे एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जाता है। इसके साथ ही भ्रूण स्थानांतरण के 14 दिनों के बाद आप प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकते हैं।
प्र.4. प्रत्यारोपण के लिए कौन से फल अच्छे हैं?
उत्तर – प्रत्यारोपण के लिए सबसे जरूरी होता है कि भ्रूण गर्भाशय की दीवार से प्रत्यारोपित हो, और इसको सफल बनाने के लिए कुछ कपल्स फल का सहारा लेते हैं। तो सबसे अच्छे फल के तौर पर आप जामुन, एवोकाडो, केला और कीवी जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं।
प्र.5. क्या नींद न आने से इम्प्लांटेशन प्रभावित होता है?
उत्तर – इस बात को लेकर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि जो भी महिलाएं इम्प्लांटेशन के दौरान 7 घंटा से कम नींद लेती हैं। उन महिलाओं में 15 प्रतिशत कम सफलता मिलती है गर्भावस्था में, उन महिलाओं के मुकाबले जो 8 घंटा की नींद लेती हैं।