Low Sperm Count

Sperm Count कम होने के लक्षण और कारण

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जब भी हम सेक्सुअल हेल्थ के बारे में बात करतें हैं, तो देखा जाता है की पुरुष वर्ग अपनी वीर्यवत्ता और प्रजननत्व को लेकर बहुत ही जागरूक रहतें हैं, जो एक बहुत ही सराहनीय बात है | 

‘Low Semen Count’ एक ऐसी समस्या है जिसे, बहुत से पुरुष अनुभव करतें हैं, और जिसको ‘Low Semen Volume’ के नाम से भी जाना जाता है | इसके बारे में जानकारी रखना बहुत ज़रूरी है और साथ ही साथ इसके लक्षणों को जानना भी हितकारी है ताकि हम दिल्ली के सबसे बेहतर IVF केंद्र (Best IVF Centre in Delhi)से इस विषय में कंसल्ट कर सकें, अगर हमे इस समस्या से जुड़ा कोई भी लक्षण अपने में दिखाए दे तो |

चलिए जानतें हैं, आखिर क्या है “Low Sperm Count” (Understanding the Term, “Low Semen Count”)

“Low Semen Count” या “Low Semen Volume” जो कि”Hypospermia” के नाम से भी प्रसिद्ध है, एक ऐसी विकृति है जिसमें सम्भोग के दौरान उठने वाली उत्तेजना में एक पुरुष द्वारा निर्गमन किया गया वीर्य सामान्य तुलना में बहुत कम मात्रा में होता है |

यूँ तो हर एक पुरुष की वीर्य निष्काषित करने की क्षमता अलग होती है, पर फिर भी अगर सामान्य रूप से देखा जाये तो, 1.5 से लेकर 5 मिली लीटर की बीच की वीर्य मात्रा, एक स्वस्थ निर्गमन का प्रतीक है | तो यदि एक पुरुष बहुत लंबे समय तक कम मात्रा में निर्गमन कर पाता है, इसका मतलब है की वह “Low Semen Count” से जुंझ रहा है |

Low Semen के लक्षण (Symptoms of Low Semen)

वीर्य-निर्गमन की मात्रा में कमी (Decreased Ejaculation Level): वीर्य का सामान्य मात्रा से काम में निर्गमन होना, लौ सीमेन वलयमे का  सबसे पहला और स्पष्ट संकेत है | ऐसा होने पर तुरंत ही एक दिल्ली के बेहतर IVF केंद्र (Best IVF Centre in Delhi ) से संपर्क करना चाहिए |

पतला वीर्य (Thin Semen): वीर्य बहुत पतला या पानी जैसा होने की समस्या वाले पुरुष Low Semen Volume की समस्या का सामना कर सकते हैं। सामान्य रूप से, वीर्य मोटा और सफेद होता है, जिसमें शुक्राणु और अन्य तत्व होते हैं।  

वीर्य निर्गमन करने में अत्यधिक कम मेहनत लगना (Reduced Ejaculatory Force): यह भी एक प्रमुख कारण है जिसमें, निर्गमन करने में सामन्य श्रम भी नहीं लगता | इसका मतलब है कि वीर्य को बाहर निकालने के लिए काफी प्रयास की आवश्यकता नहीं होती है, पेनिस ने अपनी पूर्ववर्ती शक्ति खो दी है।

प्रजनन से जुडी चिंताएं (Infertility Concerns): देखा जाये तो, Hypospermia सीधे तौर पे बाँझपन का संकेत नहीं है, लेकिन इसे एक प्रजनन से जुडी समस्या के रूप में देखा जा सकता है | अगर एक जोड़ा, संतान प्राप्त करने का प्यास कर रहा है, और ज़रूरत से ज़ादा समय लेने पर भी कोई सफलता हाथ नहीं लग रही, तो, यह Low Semen Volume की समस्या हो सकती है | 

स्पर्म काउंट कम होने के मुख्य कारण (Causes)

1. हार्मोनल असंतुलन

टेस्टोस्टेरोन या अन्य प्रजनन हार्मोन की कमी स्पर्म उत्पादन को प्रभावित करती है।

2. धूम्रपान और शराब

सिगरेट, तंबाकू और अधिक शराब स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या घटाते हैं।

3. खराब लाइफस्टाइल

नींद की कमी, तनाव, जंक फूड और एक्सरसाइज न करना बड़ी वजहें हैं।

4. अधिक गर्मी (Heat Exposure)

लैपटॉप गोद में रखना, टाइट अंडरवियर पहनना या लगातार गर्म वातावरण में काम करना।

5. संक्रमण या मेडिकल समस्या

इंफेक्शन, वैरिकोसील (Varicocele), डायबिटीज या पुरानी बीमारियां।

6. दवाइयों और केमिकल्स का असर

कुछ स्टेरॉयड, कैंसर उपचार या केमिकल एक्सपोजर स्पर्म प्रोडक्शन कम कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें :-  कैसे पुरुषों में शुक्राणु की गुणवत्ता (स्पर्म क्वालिटी) IVF की सफलता दर को प्रभावित करती है

FAQs 

1. क्या कम स्पर्म काउंट होने पर पिता बनना संभव है?

हाँ, सही इलाज, लाइफस्टाइल सुधार और मेडिकल ट्रीटमेंट जैसे IUI या IVF की मदद से पिता बनना संभव है।

2. स्पर्म काउंट बढ़ाने में कितना समय लगता है?

दिल्ली के IVF केंद्र (IVF Centre in Delhi) का मानना है कि आमतौर पर  इसमें 2–3 महीने लगते हैं क्योंकि नए स्पर्म बनने की प्रक्रिया लगभग 70–90 दिन की होती है।

3. क्या खान-पान से स्पर्म काउंट बढ़ सकता है?

हाँ, प्रोटीन, जिंक, एंटीऑक्सीडेंट, फल, हरी सब्जियां और नियमित व्यायाम स्पर्म हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।

Baby Joy
Writer has 15 years of experience in Pharmaceuticals and Health care industries, with expertise in Patient counselling and Digital Media Strategy. She is HOD of Patient counselling Dept. at Baby Joy Fertility and IVF Center.
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