Best IVF Centre in Delhi

आईवीएफ के साथ एक्टोपिक गर्भावस्था से कैसे बचें?(How to Avoid Ectopic Pregnancy with IVF?)

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आईवीएफ निसंतानता के लिए अचुक इलाज है, लेकिन एक सच यह भी है कि सहायक प्रजनन उपचार विकल्पों में से एक आईवीएफ उपचार काफी जटिल भी है। एक्टोपिक गर्भावस्था आईवीएफ उपचार की जटिलताओं का ही एक नतीजा है, और समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो परिणाम गंभीर हो सकता है। एक्टोपिक गर्भावस्था, दरअसल एक ऐसी गर्भावस्था है जो गर्भाशय में प्रत्यारोपित न होकर, उसके बाहर प्रत्यारोपित हो जाता है और ऐसा होने पर गंभीर समस्याओं का डर बना रहता है। अगर आप निसंतानता की समस्या से जुझ रहे हैं तो दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ केंद्र (Best IVF Centre in Delhi) में इलाज करवा सकते हैं।

आईवीएफ उपचार के मदद से संतानप्राप्ती मुमकिन तो है, लेकिन आपको समझना यह इलाज उतना ही जटिल है। आमतौर पर, एक्टोपिक की समस्या आईवीएफ उपचार की उन मामुली गलतीयों में से है जो बहुत ही दुर्लभ रूप से देखने के लिए मिलती है। हालांकि, इस तरह की दुर्लभ समस्या आपके लिए गंभीर परिणाम ला सकती है, और इस तरह गंभीर समस्याएं ही आईवीएफ को जटिल उपचार के श्रेणी में रखती है। अगर आप आईवीएफ उपचार करवाना चाहती हैं तो आपके लिए जरूरी हो जाता है कि आप इन बातों को कंशीडर करें, और आईवीएफ उपचार प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले जटिलताओं को जाने। आइए जानते हैं आईवीएफ के साथ एक्टोपिक गर्भावस्था से कैसे बचें?

एक्टोपिक गर्भावस्था क्या है(What Is Ectopic Pregnancy?)

आईवीएफ उपचार के दौरान भ्रूण स्थानांतरण सबसे अंतिम और अहम प्रक्रिया होती है, क्योंकि भ्रूण आरोपण के बाद ही गर्भावस्था संभव होती है। लेकिन इस प्रक्रिया में अहम हो जाता है कि भ्रूण को गर्भाशय में ही रखा जाए, जिसके बाद भ्रूण अपने शैल से बाहर निकलकर गर्भाशय की दीवार से प्रत्यारोपित होगा। हालांकि, निषेचित अंडे या भ्रूण गर्भाशय गुहा में आरोपित न होकर उसके बाहर प्रत्यारोपित हो जाते हैं तो एक्टोपिक गर्भावस्था कहलाता है। आमतौर पर, इस तरह का प्रत्यारोपण गर्भाशय गुहा के बाहर यानी फैलोपियन ट्यूब में प्रत्यारोपित हो जाता है।

क्योंकि भ्रूण को जीने के लिए सहारा और पोषण की जरुरत होती है, जो उसे सिर्फ गर्भाशय में प्रत्यारोपित होने के बाद ही मिलता है। ऐसे में फैलोपियन ट्यूब के बढ़ते ऊतक भ्रूण को सहारा नहीं दे सकते, इसलिए गर्भावस्था व्यवहार्य नहीं है। और एक्टोपिक गर्भावस्था से मां को आंतरिक रक्तस्राव, संक्रमण और अंग क्षति सहित गंभीर समस्याओं का डर रहता है।

एक्टोपिक गर्भावस्था और आईवीएफ में संबंध( Connection between Ectopic Pregnancy and IVF)

आईवीएफ उपचार के बारे में हम सभी जानते हैं, और इस उपचार ने अभी तक लाखों निसंतान परिवारों का सपना पूरा किया है। इस प्रजनन उपचार ने अपनी सफलता से हजारों बांझ कपल्स को संतानप्राप्ती की एक उम्मीद प्रदान की है। लेकिन उपचार प्रक्रिया के दौरान छोटी सी भी गलती उपचार सफलता को प्रभावित कर सकती है, और एक मरीज को गंभीर समस्याओं से ग्रसीत कर सकती है। एक्टोपिक गर्भावस्था भी भ्रूण elivery drugstore

स्थानांतरण प्रक्रिया में आई किसी कमी का नतीजा होता है।

हालांकि, आईवीएफ के दौरान एक्टोपिक गर्भावस्था की समस्या के पीछे कई कारक होते हैं। जैसे में भ्रूण की गुणवत्ता, भ्रूण स्थानांतरण की विधि और अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियां जैसे ट्यूबल रोग या पिछली पेल्विक सर्जरी।

अगर आप संतानप्राप्ती के लिए आईवीएफ उपचार कराना चाहते हैं, तो दिल्ली में आईवीएफ लागत (IVF Cost in Delhi) आपके लिए किफायती होगा।

आईवीएफ में एक्टोपिक गर्भावस्था के जोखिम कारक(Risk Factors for Ectopic Pregnancy in IVF)

आपको बता दें कि ऐसे कई कारक होते हैं जिसके कारण अस्थानिक गर्भावस्था(एक्टोपिक गर्भावस्था) का कारण बनते हैं।

पिछली एक्टोपिक गर्भावस्था(Previous Ectopic Pregnancy) – जिन महिलाओं ने पहले भी एक्टोपिक गर्भावस्था की समस्या से ग्रसीत हुई हैं, और अगर वो संतानप्राप्ती के लिए आईवीएफ का सहारा लेती हैं तो मुमकिन है कि उन्हें दोबारा इसका अनुभव होने का खतरा अधिक होता है।

फैलोपियन ट्यूब की समस्या(Fallopian Tube Issues) – इस बात से हम सभी वाकिफ हैं कि फैलोपियन ट्यूब में किसी भी तरह की समस्या बांझपन का कारण बनता है। ऐसे में अगर किसी महिला में फैलोपियन ट्यूब अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त है तो इसकी काफी उम्मीद होती है कि आपको एक्टोपिक गर्भावस्था से जुझना पड़ सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस(Endometriosis) – इस समस्या में आप पाएंगे कि गर्भाशय की परत में पाए जाने वाले उत्तक गर्भाशय के बाहर भी बढ़ने लगता है। इन उत्तकों के बाहर बढ़ने के कारण आसंजन और घाव जैसी दिक्कतें होने लगती है, जो आपके प्रजनन अंग सिकुड़ने लगते हैं और भ्रूण के परिवहन में बाधा उत्पन्न करते हैं। यह एक्टोपिक गर्भावस्था को बढ़ाने में योगदान देता है।

उन्नत मातृ आयु(Advanced Maternal Age) – आमतौर पर, आईवीएफ उपचार के लिए अहम होता है कि आपकी आयु 35 वर्ष के लगभग हो, क्योंकि ऐसा पाया गया है कि 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में अस्थानिक गर्भावस्था का खतरा अधिक होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, वैसे ही हमारी प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। जैसे – अधिक उम्र की महिलाओं में अंडे की गुणवत्ता में गिरावट आती है, कंसीव करने में समस्या आती है और इस तरह की समस्या एक्टोपिक गर्भावस्था का कारण है।

एकाधिक भ्रूण स्थानांतरण(Multiple Embryo Transfers) – आईवीएफ उपचार के दौरान अगर एक चक्र में एक से अधिक भ्रूण को स्थानांतरीत किया जाता है तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि भ्रूण गर्भाशय के बाहर प्रत्यारोपित हो जाए। और ऐसा होना एक्टोपिक गर्भावस्था का कारण बनता है। इसके अलावा भी अगर एक से अधिक भ्रूण स्थानांतरण बच्चा और जच्चा दोनों के लिए समस्यात्मक होता है। क्योंकि ऐसा होने पर मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित होता है।

ऐसे कई जोखिम है जो एक्टोपिक गर्भावस्था का कारण बनती है, और ऐसा होना महिला के प्रजनन स्वास्थ्य के साथ जान का भी खतरा होता है।

निष्कर्ष(Conclusion)

एक्टोपिक गर्भावस्था, दरअसल एक ऐसा गर्भावस्था है जो गर्भाशय में प्रत्यारोपित न होकर…गर्भाशय के बाहर प्रत्यारोपित हो जाता है। और ऐसा होना निषेचित अंडा और मां दोनों के लिए समस्यात्मक होता है। क्योंकि निषेचित गर्भाशय के बाहर पनप नहीं पाएगा, और इस गर्भावस्था के कारण मां को संक्रमण और रक्त स्राव जैसी समस्या से जुझना पड़ता है। एक्टोपिक गर्भावस्था का कारण कई विभिन्न कारक होते हैं, जैसे में भ्रूण स्थानांतरण विधि में किसी तरह कमी, मां का अधिक आयु होना, एक से अधिक भ्रूण स्थानांतरण और फैलोपियन ट्यूब में समस्या होना। अगर आप निसंतानता की समस्या से जुझ रहे हैं तो दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ केंद्र (Best IVF Centre in Delhi) में इलाज करवा सकते हैं।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

प्र.1. आईवीएफ भ्रूण एक्टोपिक कैसे बन जाता है?

उत्तर – आईवीएफ उपचार के भ्रूण स्थानांतरण प्रक्रिया में आई कोई कमी या फिर सही तरीके सेसही जगह पर भ्रूण का आरोपण नहीं होने के कारण…भ्रूण गर्भाशय के बाहर प्रत्यारोपित हो जाता है और एक्टोपिक बन जाता है।

प्र.2. एक्टोपिक गर्भावस्था का दर्द कब शुरू होता है?

उत्तर- एक्टोपिक गर्भावस्था के बारे में या दर्द आपको गर्भावस्था  के 4-12वें सप्ताह के दौरान पता चलता है।

प्र.3. एक्टोपिक गर्भावस्था से सबसे ज्यादा जोखिम किसे होता है?

उत्तर- एक्टोपिक गर्भावस्था का सबसे ज्यादा डर उन्हें होता है जिन्हें पहले भी एक्टोपिक गर्भावस्था की समस्या से जुझ चुके हैं।  

प्र.4. एक्टोपिक गर्भावस्था का शीघ्र पता कैसे लगाएं?

उत्तर – एक्टोपिक गर्भावस्था का तुरंत पता लगाने के लिए आप अल्ट्रासाउंड स्कैन की मदद ले सकती हैं। ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड स्कैन करने से पता चल जाएगा कि आप एक्टोपिक गर्भावस्था से ग्रसीत हैं या नहीं।   

प्र.5. एक्टोपिक गर्भावस्था के तीन लक्षण क्या हैं?

उत्तर – एक्टोपिक गर्भावस्था से ग्रसीत महिलाओं में तीन लक्षण बहुत ही सामान्य होते हैं। लक्षण जैसे – मासिक धर्म न आना, योनि से रक्तस्राव और पेट में दर्द।

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