क्या आईवीएफ के कई चक्र से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है?( Multiple IVF Cycle Increase the Risk of Cancer in Hindi)

Post by Baby Joy 0 Comments

बांझपन की समस्या को पैदा करने में अब कई कारक शामिल होते जा रहे हैं, और इन कारकों का प्रभाव अच्छे-खासे कपल्स के भी प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। ऐसे में कपल्स को संतानप्राप्ती के लिए आईवीएफ उपचार का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि, कपल्स में उपचार से पहले कई तरह के सवाल होते हैं, जैसे – क्या आईवीएफ के कई चक्र से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है? गुड़गांव में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Gurgaon) के अनुसार आईवीएफ उपचार से गर्भावस्था को मुमकिन बनाने के लिए दो-तीन चक्र लग जाते हैं।   

क्या आईवीएफ के कई दौर से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है? इस तरह के सवाल आईवीएफ उपचार को लेकर मरीजों के अंदर संदेह को पैदा करता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि मरीज उपचार संबंधित-जानकारी को लेकर रिसर्च करें।

क्या है आईवीएफ प्रक्रिया(What is IVF process?)

आईवीएफ एक आक्रमक उपचार विकल्प है, और इसकी प्रक्रियाएं या फिर कहें चरण उपचार को जटिल बनाती है। लेकिन आपको एक बात समझना होगा कि आईवीएफ प्रक्रियाओं के साथ-साथ आपकी प्रजनन क्षमत ा भी चक्र के अवसर का एक कारक होता है। आईवीएफ प्रक्रिया का पहला चरण होता है डिम्बग्रंथि को उत्तेजित करना, ताकी ओव्यूलेशन के दौरान अधिक परिपक्व अंडे रिलीज हो। इसके बाद कि प्रक्रिया कहलाती है अंडा पुनर्प्राप्ति, इसमें रिलीज किए अंडो को शरीर से बाहर निकलाकर प्राप्त करते हैं। और इसी के साथ पुरूष पार्टनर से शुक्राणु को संग्रहीत किया जाता है।

शुक्राणु और अंडो को प्राप्त करने के बाद लैब में इन दोनों को निषेचित करके भ्रूण को तैयार किया जाता है, और फिर भ्रूण के गुणवत्ता और व्यवहार्य को जांचा जाता है। इसके साथ गर्भाशय के वाता वरण को जांचा जाता है। ताकी उपचार की आखीरी प्रक्रिया को परफॉर्म किया जाय, जिसे भ्रूण स्थानांतरण कहते हैं। भ्रूण का जांच होने के बाद उसे गर्भाशय में आरोपित कर दिया जाता है, और इसके बाद उम्मीद की जाती है कि भ्रूण अपने शैल से बाहर निकलकर गर्भाशय की दीवार से प्रत्यारोपित हो जाए।

क्यों होती है आईवीएफ चक्र विफल(Why do IVF cycles fail?)

गुड़गांव में आईवीएफ क्लिनिक(IVF clinic in Gurgaon) के अनुसार एक मरीज के तौर पर आपके लिए यह समझना भी जरूरी होती है कि आईवीएफ चक्र विफल कब होता है। गर्भाशय में भ्रूण के आरोपण के बाद, 10-14 दिन का समय लगता है, भ्रूण को अपने शैल से बाहर निकलकर गर्भाशय की दीवार में प्रत्यारोपित होने के लिए। लेकिन 10-14 दिन के बाद जब आप प्रग्नेंसी टेस्ट करती है, तो आप निगेटीव होती हैं। निगेटीव होने का कारण दो स्थिति हो सकती है, पहला कि भ्रूण का शैल ज्यादा कसा हुआ होता है, जिसके कारण वो अपने शैल से बाहर नहीं निकल पाता है। तो वो गर्भाशय के दीवार से प्रत्यारोपित नहीं होगा।

दूसरी स्थिति –  गर्भाशय का वातावरण होता है, जो भ्रूण को बाहर आने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है। जिसके प्रत्यारोपण की स्थिति बन ही नहीं पाती है। इस तरह की स्थितियां विफल आईवीएफ चक्र का कारण बनती है। इनमें एक स्थिति से बचने के लिए डॉक्टर के पास विकल्प होता है कि भ्रूण के शैल को लेजर के मदद से पतला कर देते हैं, ताकी भ्रूण को शैल से बाहर निकलना आसान हो जाता है।

हार्मोनल उत्तेजना और कैंसर का खतरा(Hormonal Stimulation and Cancer Risk)

आपको बता दें कि डिम्बग्रंथि को उत्तेजित करने वाले प्रजनन दवाओं में गोनाडोट्रोपिन और क्लोमीफीन साइट्रेट जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो अंडाशय को उत्तेजित करने के लिए जिम्मेदार होता है। लेकिन इस दवाओं का सेवन महत्वपूर्ण हार्मोनल परिवर्तन भी लेकर आती है, और हार्मोनल परिवर्त्तन कई तरह की समस्या का भी एक कारण बनता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन हार्मोनल उतार-चढ़ाव से कैंसर, विशेषकर डिम् बग्रंथि और स्तन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है?  

कैंसर को लेकर संभावनाएं और शोध का निष्कर्ष(Possibilities and Research findings Regarding Cancer)

आईवीएफ उपचार और कैंसर को लेकर किए गए अध्ययनों में बढ़ते समय के साथ बदलाव देखने के लिए मिला है। और इन दोनों के बीच के संबंध को लेकर काफी समय से अध्ययन किया गया है। प्रारंभिक अध्ययनों ने एक संभावित संबंध का सुझाव दिया था, लेकिन हाल के शोध ने अधिक आश्वस्त करने वाली तस्वीर प्रदान की है।

617,000 से अधिक प्रतिभागियों को शामिल करते हुए, 25 अध्ययनों के एक व्यापक मेटा-विश्लेषण में मल्टीपल आईवीएफ चक्रों से गुजरने वाली महिलाओं को लेकर किए गए शोध में पाया गया है कि मल्टीपल चक्रों वाली महिलाओं में स्तन कैंसर के खतरे में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं पाई गई। इसी तरह, अध्ययनों ने आईवीएफ और डिम्बग्रंथि या गर्भाशय कैंसर के बीच कोई मजबूत संबंध नहीं दिखाया है। ऐसे में गुड़गांव में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Gurgaon) का कहना कि मल्टीपल आईवीएफ चक्र वाली महिलाएं कैंसर से ग्रसीत हो सकती हैं, तो यह स्थिति की चित्र बहुत ही दुर्लभ है।  

जेनेटिक्स की भूमिका: एक जटिल पहेली(The Role of Genetics: A Complex Puzzle)

आमतौर पर, गुड़गांव में आईवीएफ लागत (IVF Cost in Gurgaon) ज्यादा नहीं होती है, लेकिन फिर भी किसी भी उपचार से पहले आपके लिए आश्वस्त होना जरूर ी है। बांझपन और कैंसर की समस्या को लेकर एक कॉमन बैकग्राउंड पर आएं, तो पाएंगे कि दोनों ही समस्या आनुवांशिक रूप से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है। ऐसे में इस बात में कोई शक नहीं है कि इस तरह की समस्या में जेनेटिक्स की भूमिका अहम हो जाती है। कुछ आनुवंशिक उत्परिवर्तन, जैसे बीआरसीए जीन उत्परिवर्तन, कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़े हैं।  

निष्कर्ष(Conclusion)

एक कपल जब प्रजनन उपचार के लिए तैयार होता है तो उसके मन में कई तरह के सवाल चल रहे होते हैं, एक जाहिर-सी बात है। और क्या आईवीएफ के कई चक्र से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है? इस तरह के सवाल इन्हीं बातों के प्रमाण हैं। बात रही आईवीएफ और कैंसर को लेकर, तो आपको बता दें कि मल्टीपल चक्र से कैंसर की संभावना का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। ऐसे में किसी भी तरह की प्रतिक्रिया एक नेरैटीव को सेट करना होगा। इसके साथ ही हरेक महिला अद्वितीय होती है, और हर किसी में समस्या होना और न होने को लेकर अलग-अलग स्थिति होती है।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र.1. क्या आप आईवीएफ के एक चक्र से गर्भवती हो सकती हैं?

उत्तर – आईवीएफ के एक चक्र में आप गर्भवती तो हो जाएगी, लेकिन आमतौर इस तरह की उपचार में लोगों की उम्मीद होती है कि उन्हें पहली बार में सफलता मिला जाए। और यह भी मुमकिन है। हालांकि, कुछ महिलाओं को गर्भावस्था को प्राप्त करने में एक से अधिक चक्र लग जाता है।

प्र.2. आईवीएफ का पहला चक्र कितना सफल है?

उत्तर- आईवीएफ उपचार के दौरान कई महिलाओं को पहली चक्र में ही सफलता मिल जाती है। आंकड़ो के तौर पर बतायें तो पहले प्रयास में आईवीएफ की सफलता दर 30% से 40% तक होती है। यानी 100 में 30-40 महिला आईवीएफ के पहले चक्र में गर्भावस्था को प्राप्त कर लेती हैं।   

प्र.3. क्या आईवीएफ के मल्टीपल चक्र से कैंसर हो सकता है?

उत्तर – कैंसर और आईवीएफ के मल्टीपल चक्र के बीच किसी तरह का स ंबंध स्थापित कर पाना मुश्किल है, लेकिन अंडो की संख्या को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रजनन दवाओं के कारण कैंसर की स्थिति पैदा हो सकती है।    

प्र.4. आईवीएफ से कैंसर का खतरा कितना बढ़ जाता है?   

उत्तर – सही मायनो में कहा जाए तो आईवीएफ के कारण कैंसर की स्थिति को लेकर कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। क्योंकि इस तरह की स्थिति बहुत ही दुर्लभ होती है, और इन्हीं कारणों से इसको लेकर जांच या अध्ययन में भी कुछ खास निकलकर नहीं आया है।    

प्र.5. क्या आईवीएफ के मल्टीपल चक्र के लिए जाना सुरक्षित है?

उत्तर – आपको बता दें कि आईवीएफ के मल्टीपल चक्र के लिए जाना किसी का शौक नहीं होता है। चक्रों के विफल होने के कारण ही इस तरह के निर्णय लिए जाते हैं, और इस बात में कोई शक नहीं है कि आईवीएफ मल्टीपल चक्र सुरक्षित है। जिन कपल्स को पहली बार में सफलता नहीं मिलता है, उन लोगों के लिए यह जरूरी हो जाता है।

Leave a Reply