What is Sperm DNA Fragmentation Index

शुक्राणु डीएनए विखंडन सूचकांक (डीएफआई) क्या है? (Sperm DNA Fragmentation index – DFI?)

Post by Baby Joy 0 Comments

आज हर कोई एआरटी की मदद से अपने परिवार का सपना पूरा कर रहा है। आईवीएफ ने लोगों को दूसरा जीवन दे दिया है, और इलाज की सफलता दर ने लोगों का भरोसा भी जीता है। अगर आईवीएफ इलाज विफल हो जाता है तो क्या होगा, ऐसे मामलों में जांच किया जाता है कि विफलता का कारण क्या है? ऐसी स्थिति में शुक्राणु डीएनए विखंडन सूचकांक (डीएफआई) का उपयोग किया जाता है। अब आप में से बहुत लोग डीएफआई टर्म को पहली बार सुन रहे होगें, आपको बता दें आईवीएफ इलाज एक बार विफल होने के बाद भी, आप आईवीएफ को एक बार फिर से कराना चाहते हैं तो आपके इलाज से पहले शुक्राणु डीएनए विखंडन सूचकांक जांच कराना पड़ता है। डीएफआई इलाज के लिए आप दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ केंद्र (Best IVF Centre in Delhi) की सहायता ले सकते हैं।

चलिए जानते हैं कि शुक्राणु डीएनए विखंडन सूचकांक (डीएफआई) क्या है?(Let us know what the Sperm DNA Fragmentation Index (DFI))

डीएफआई से पता चलता है कि शुक्राणु में कितने विखंडित डीएनए मौजुद हैं, और इसे एक रिपोर्ट कार्ड की तरह रखा गया जिसमें विखंडित डीएनए को उसकी मात्रा के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी में स्थान दिया गया है। जब डीएफआई की जांच रिपोर्ट में 30% या उससे अधिक मात्रा में डीएफआई वाले शुक्राणु मौजूद होते हैं, तो इसका मतलब होता है कि 30% से अधिक शुक्राणुओं में विखंडित डीएनए उपलब्ध हैं।

डीएनए विखंडन सूचकांक (डीएफआई) एक उचित इलाज और बेहतर पूर्वानुमान उपकरण है। लेकिन आपको बता दें कि डीएनए विखंडन शुक्राणु को नुकसान पहुंचाता है, जो सीधे तौर पर प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है जिससे बांझपन की समस्या हो सकती है। और इस तरह से डीएनए विखंडन बांझपन का कारण भी बन जाता है। आमतौर, पर इस तरह की समस्या उन्हीं पुरूषों मे पायी जाती है जिन्हें बांझपन की दिक्क्त होती है।

शुक्राणु के डीएनए विखंडन सूचकांक की गणना के रिस्क क्या हैं?

(What are the risks of calculating the sperm DNA fragmentation index?)

ऐसा कहा जाता है कि शुक्राणु डीएनए विखंडन से उत्पन्न होने वाले जोखिमों से पुरुष के स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन शुक्राणु पर इसका प्रभाव होता है।। हालांकि, डीएफआई गणना प्रक्रिया की कुछ सीमाएं हैं।

डीएनए का भेद (Distinction of DNA) – ऐसा माना जाता है कि मानव शरीर को गतिमान बनाये रखने के लिए डीएनए का कुछेक समूह ही भूमिका निभाते हैं। ऐसे में विखंडन परीक्षण प्रक्रिया के दौरान उपयोगी और अनुपयोगी डीएनए के बीच अंतर करने का कोई फायदा नहीं होने वाला है।  

डीएनए विखंडन की सीमा (Limit of DNA fragmentation) – ऐसा कुछ प्रस्तावित तो नहीं है कि शुक्राणु विखंडन से जुड़ी कोई मान्यता प्राप्त सीमा नहीं है। लेकिन एक बात अच्छी तरह से समझा जा सकता है कि प्रोडक्टिव पुरुष, कम प्रोडक्टिव और बांझ पुरुषों के मुकाबले में विखंडन के बहुत कम स्तर प्रदर्शित करते हैं। लेकिन फिर भी एक अंतरविरोध है जिस पर शोध किया जाना चाहिए।

डीएफआई ही क्यों?

(Why DFI)

यह प्रक्रिया विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों में पुरुष बांझपन जो निदान चाहते हैं। उनकी मदद होगी और अगर आप आईवीएफ इलाज करवाना चाहते हैं तो दिल्ली में उचित आईवीएफ लागत (IVF Cost in Delhi) पर आईवीएफ केंद्र (IVF Centre) में इलाज होगा। 

  • अस्पष्टीकृत बांझपन
  • ख़राब या बाधित भ्रूण विकास के इतिहास वाले जोड़े
  • एकाधिक विफल एआरटी चक्र
  • बार-बार गर्भपात होना
  • उन्नत पुरुष आयु
  • वैरिकोसेले
  • असामान्य वीर्य विश्लेषण
  • हानिकारक पदार्थों, तंबाकू, शराब, विकिरण आदि के संपर्क में आना।

डीएफआई के फायदे

(Benefits of DFI)

इस प्रक्रिया की मदद से हम सभी को ये समझने में मदद मिलती है कि पुरुष के वीर्य का उपयोग किया जा सकता है या नहीं। यदि शुक्राणु में विखंडन उच्च स्तर का है, तब हम एक शुक्राणु दाता को नियोजित करने का सुझाव देते हैं। इस तरह के सूचकांक की वजह से हमें ये पता बहुत जल्दी चल जाता है कि महिला गर्भधारण क्यों नहीं कर पा रही है, और डीएफआई का हमारे स्वास्थ्य पर कोई खास प्रभाव नहीं है।

निष्कर्ष

शुक्राणु डीएनए विखंडन सूचकांक (डीएफआई) शुक्राणु में मौजूद खंडित डीएनए की मात्रा को मापता है, आपको जानना चाहिए कि ये आपके प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है और बांझपन का कारण भी बन सकता है। यह अस्पष्टीकृत बांझपन, बार-बार गर्भपात और असामान्य वीर्य विश्लेषण जैसे मामलों में पुरुष बांझपन का निदान करने के लिए एक उपयोगी उपकरण की तरह है।
हालांकि डीएफआई का स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव तो नहीं पड़ता है, लेकिन यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि क्या शुक्राणु का उपयोग गर्भधारण के लिए हो सकता है या फिर शुक्राणु दाता की जरूरत है। कुल मिलाकर, डीएफआई बांझपन के संभावित कारणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है और प्रजनन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे वैवाहिक जोड़ों के लिए उपचार विकल्पों का मार्गदर्शन कर सकता है। डीएफआई इलाज के लिए आप दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ केंद्र (Best IVF Centre in Delhi) की सहायता ले सकते हैं। 

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या डीएफआई का शुक्राणु पर प्रभाव पड़ता है?

उत्तर- हां, डीएफआई का शुक्राणु पर प्रभाव पड़ता है और इससे प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है।  

2. डीएफआई की समस्या से सबसे ज्यादा कौन प्रभावित होता है?

उत्तर- आमतौर पर इस तरह की समस्या सबसे ज्यादा पुरूषों में पाई जाती है, जो पुरूष बांझपन की समस्या से ग्रसीत हो। 

3. डीएफआई के फायदे क्या है?

उत्तर- इस प्रक्रिया की मदद से ये पता चलता है कि भ्रुण तैयार करने के लिए पुरुष के वीर्य का उपयोग किया जा सकता है या नहीं।

4. अगर आईवीएफ इलाज विफल हो जाता है, तो डीएफआई कैसे मदद कर सकता है?

उत्तर- ऐसे मामलों में विफलता के कारण की जांच की जाती है, और ऐसी स्थिति में शुक्राणु डीएनए विखंडन सूचकांक (डीएफआई) का उपयोग करके पता लगाया जाता है कि शुक्राणु ही तो वजह नहीं है। 

5. किसी भी आईवीएफ केंद्र में डीएफआई जांच करवा सकते हैं?

उत्तर- हां, आप किसी भी आईवीएफ केंद्र में इसकी जांच करवा सकते हैं, और बेबी जॉय आईवीएफ सेंटर में आईवीएफ इलाज पर ऑफर भी उपलब्ध है।

Baby Joy
Writer has 15 years of experience in Pharmaceuticals and Health care industries, with expertise in Patient counselling and Digital Media Strategy. She is HOD of Patient counselling Dept. at Baby Joy Fertility and IVF Center.
| Website

Leave a Reply