Can I Get IVF Without My Husband

क्या मैं अपने पति के बिना आईवीएफ कर सकती हूँ?

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आईवीएफ उपचार ने लाखों कपल्स के साथ-साथ कई सिंगल महिलाओं को मां बनने का मौका प्रदान किया है। ऐसे में क्या मैं अपने पति के बिना आईवीएफ कर सकती हूँ? इस तरह के सवाल यह बताते हैं कि समाज को एक वर्ग आज भी आईवीएफ उपचार और इसकी क्षमता को लेकर अनभिज्ञ है। गुड़गांव में शीर्ष आईवीएफ केंद्र(Top IVF centre in Gurgaon) बताते हैं कि आईवीएफ उपचार विकल्प को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसकी मदद से बांझ कपल्स के साथ-साथ सिंगल महिलाएं और LGBTQ वाले कपल्स भी संतानप्राप्ती को पूरा कर सकते हैं।

इस लेख में आप जानेंगे कि क्या मैं अपने पति के बिना आईवीएफ कर सकती हूँ?

भारत में आईवीएफ को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा(Legal Framework Governing IVF in India)

गुड़गांव में आईवीएफ सेंटर(IVF Centre in Gurgaon) बताते हैं कि भारत में आईवीएफ को नियंत्रित करने वाले अधिनियम के अनुसार सिंगल महिला भी प्रजनन उपचार के उपयुक्त हैं। भारत सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 (ART अधिनियम) के माध्यम से सहायक प्रजनन तकनीकों को नियंत्रित करता है। यह कानून आईवीएफ के लिए पात्रता मानदंड, रोगियों के अधिकार और प्रजनन क्लीनिकों की ज़िम्मेदारियों को रेखांकित करता है।

एआरटी अधिनियम के तहत सहमति की आवश्यकताएं (Consent Requirements Under the ART Act)

गुड़गांव में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ क्लीनिक(Best IVF Clinic in Gurgaon) बताते हैं कि एआरटी अधिनियम के तहत यह तय किया गया है कि प्रजनन उपचार में शामिल कपल्स या फिर सिंगल महिला को लिखित रूप सूचित करना होगा और सहमति प्रदान करें। इसमें शामिल हैं:

  • कमीशनिंग कपल (पति और पत्नी)।
  • महिला आईवीएफ करवा रही है (यदि अविवाहित है)।
  • यदि लागू हो तो शुक्राणु या अंडा दाता।

एआरटी अधिनियम के अनुसार, विवाहित महिला जो आईवीएफ उपचार करवाना चाहती हैं, उनके लिए पति की सहमति जरूरी माना जाता है। हालांकि, हाल ही में न्यायालय के फ़ैसलों ने इस आवश्यकता को चुनौती दी है, जिसमें महिला की शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन अधिकारों पर ज़ोर दिया गया है।

पति की सहमति के बिना आईवीएफ पर हाल ही में न्यायालय के फैसले(Recent Court Rulings on IVF Without Husband’s Consent)

गुड़गांव में टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर(Test tube Baby Center in Gurgaon) बताते हैं कि आईवीएफ उपचार के लिए पति की सहमती को लेकर अदालतों में चर्चा हुई है, और आईवीएफ के बारे में चर्चा को आकार दिया है। भारतीय अदालतों में आईवीएफ के लिए पति की सहमति को लेकर हुए सुनवाई निम्नलिखित हैः

  • दिल्ली उच्च न्यायालय (2018): अपने पति की सहमति के बिना डोनर स्पर्म के साथ आईवीएफ चाहने वाली एक महिला के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें प्रजनन स्वायत्तता के उसके मौलिक अधिकार का हवाला दिया गया।
  • बॉम्बे उच्च न्यायालय (2022): घोषित किया कि आईवीएफ के लिए पति की सहमति की आवश्यकता एक महिला की गोपनीयता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करती है।
  • भारत का सर्वोच्च न्यायालय (2023): वर्तमान में महिलाओं के प्रजनन अधिकारों के लिए संभावित निहितार्थों के साथ एआरटी अधिनियम की सहमति की आवश्यकता को चुनौती देने की समीक्षा कर रहा है।

भारतीय अदालतों ने आईवीएफ के लिए पति की संलिप्ता को लेकर बयान जारी किया है। जिसके तहत एक महिला के पति की मंजूरी के बिना भी आईवीएफ से गुजरने के स्वतंत्र अधिकार को मान्यता देने की ओर बदलाव का संकेत देते हैं।

पति-पत्नी की सहमति के बिना आईवीएफ में नैतिक विचार(Ethical Considerations in IVF Without Spousal Consent)

गुरूग्राम में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर(Best IVF Centre in Gurugram) के अनुसार अदालतों की इन सुनवाईयों ने आईवीएफ के लिए महिलाओं को स्वतंत्रता का संकेत रहा है, लेकिन हमें यह भी सोचना होगा कि पति की सहमति के बिना आईवीएफ में नैतिक विचार को लेकर चर्चा बनता है। चर्चा का विषय निम्नलिखित हैः

बच्चे की कानूनी स्थिति(Child’s Legal Status) – यदि कोई महिला अपने पति की सहमति के बिना आईवीएफ करवाती है, तो बच्चे के कानूनी अधिकारों और माता-पिता की ज़िम्मेदारियों के बारे में सवाल उठना जगजाहिर है। हालांकि, कपल्स के मामले में शुक्राणु पुरूष पार्टनर से संग्रहीत की जाती है, अगर ऐसी स्थिति में शुक्राणु दाता का सहारा लिया जाता है तो स्थिति कानूनी मामलों में उलझ कर रहा जाएगा।

सामाजिक कलंक (Social Stigma) – सही मायनों में कहा जाए तो भारत में बांझ होना या फिर बांझपन की स्थिति एक सामाजिक कलंक है। भारत में, सामाजिक मानदंड अक्सर प्रजनन उपचार को पति-पत्नी के बीच एक संयुक्त निर्णय मानते हैं। जबकि सच यह है कि बांझपन एक चिकित्सा स्थिति है, व्यक्तिगत मुद्दा नहीं !

गुप्तता और गोपनीयता(Privacy and Confidentiality) – स्वतंत्र रूप से आईवीएफ का विकल्प चुनने वाली महिलाओं को गोपनीयता बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर डोनर स्पर्म से जुड़े मामलों में।

भारत में एकल महिलाओं के लिए आईवीएफ(IVF for Single Women in India)

गुड़गांव में शीर्ष आईवीएफ केंद्र(Top IVF centre in Gurgaon) के अनुसार भारत में सिंगल महिला के मां बनने के लिए आईवीएफ उपचार करवा सकती हैं, लेकिन महिला को कुछ मानदंडों को पूरा करना होगा। मानदंड निम्नलिखित हैः

  • उनकी उम्र 21 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • यदि आवश्यक हो तो डोनर स्पर्म का उपयोग कर सकती हैं।
  • बच्चे पर पूर्ण अभिभावकीय अधिकार होते हैं, शुक्राणु दाता के लिए कोई कानूनी दायित्व नहीं होता।

एआरटी अधिनियम के अंतर्गत यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि वैवाहिक स्थिति की परवाह किए बिना महिलाएं प्रजनन उपचार प्राप्त कर सकती हैं।

Frequently Asked Questions

प्र.1. क्या आईवीएफ पति के बिना किया जा सकता है?

उत्तर –सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम 2021 के तहत इसे वैध माना जाता है। सिंगल महिला भी संतानप्राप्ती के लिए आईवीएफ उपचार को लाभ उठा सकती हैं।           

प्र.2. क्या आप बिना साथी के आईवीएफ करवा सकते हैं?

उत्तर –सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम 2021 में मेंशन किया गया है कि अगर महिला आईवीएफ उपचार करवाना चाहती हैं, तो पति की सहमति जरूरी होती थी। लेकिन इस विषय को लेकर भारतीय अदालतों ने महिला के फैवर में सुनवाई दी है, और पति की सहमति को जरूरी नहीं बताया है।          

प्र.3. क्या मुझे आईवीएफ के लिए किसी पुरुष की आवश्यकता है?

उत्तर – आईवीएफ के लिए जरूरी होता है कि अंडो के साथ-साथ शुक्राणु को संग्रहीत किया जाता है, ताकी भ्रूण को तैयार किया जा सके। अगर आप विवाहित हैं तो अपने पार्टनर का शुक्राणु ले सकती है। लेकिन अगर आप सिंगल महिला हैं तो शुक्राणुदाता का सहारा ले सकती हैं।

Baby Joy
Writer has 15 years of experience in Pharmaceuticals and Health care industries, with expertise in Patient counselling and Digital Media Strategy. She is HOD of Patient counselling Dept. at Baby Joy Fertility and IVF Center.
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