टेस्ट-ट्यूब बेबी किसे कहते हैं और टेस्ट ट्यूब बेबी क्या होता है(What is test-tube baby in Hindi)

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सही मायनो में कहा जाए तो जब टेस्ट-ट्यूब बेबी शब्द को सुनते हैं तो ऐसा लगता है कि मानो भविष्य की विज्ञान कथाओं की छवियों को उजागर कर रहा हो। कभी-कभी टेस्ट-ट्यूब बेबी अकल्पनीय लगता है, लेकिन विज्ञान के चमत्कार से हम सभी वाकिफ हैं। हालांकि, दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Delhi) के अनुसार कपल्स अक्सर कंफ्यूज होते हैं – टेस्ट-ट्यूब बेबी और आईवीएफ उपचार को समझने म ें, और कपल्स का सवाल होता है – टेस्ट-ट्यूब बेबी किसे कहते हैं और टेस्ट ट्यूब बेबी क्या होता है? आपको बता दें कि टेस्ट-ट्यूब बेबी, दरअसल आईवीएफ उपचार से पैदा हुए बच्चों को ही कहते हैं।

क्या है आईवीएफ की मूल बातें(What are the basics of IVF?)

आईवीएफ की मूल बात को समझने के लिए शुरुआत करते हैं कि यह एक प्रजनन उपचार विकल्प है, और इस विकल्प के मदद से अभी तक लाखों बांझ कपल्स के संतानप्राप्ती का सपना पूरा हुआ है। बांझपन के मामले में आईवीएफ सबसे सफल और प्रमुख उपचार विकल्प है। इसके नाम को समझें “शब्द “इन विट्रो” का अनुवाद “ग्लास में” है, जो पेट्री डिश या टेस्ट ट्यूब को संदर्भित करता है जहां निषेचन होता है।” तो समझ में आएगा कि इन विट्रो का मतलब होता ग् लास का बना हुआ टेस्ट ट्यूब, और फर्टिलाइजेशन का मतलब होता है – निषेचन। इसलिए आईवीएफ उपचार से पैदा हुए बच्चों को टेस्ट-ट्यूब बेबी कहते हैं।

क्या है आईवीएफ प्रक्रिया चरण-दर-चरण(What are the IVF Process Step-by-Step)

आईवीएफ उपचार प्रक्रिया ही इस उपचार को थोड़ा जटिल बनाती है, लेकिन एक सच यह भी है कि प्रक्रियाएं ही गर्भावस्था को मुमकिन बनाने का काम करती है। इसकी प्रक्रियाओं को सफल बनाने के लिए प्रजनन दवाओं सहीत कई तरह के कारकों का इस्तेमाल किया जाता है। डिम्बग्रंथी उत्तेजना से शुरू होकर भ्रूण स्थानांतरण तक चलने वाले इस उपचार की प्रक्रिया में समय काफी अहम होता है। आईवीएफ प्रक्रिया को चरण-दर-चरण समझते हैः

डिम्बग्रंथि उत्तेजना(Ovarian Stimulation) – उपचार प्रक्रिया के इस पहले चरण में अंडो की संख्या को बढ़ाने के लिए डिम्बग्रंथि को उत्तेजित किया जाता है। डिम्बग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए प्रजनन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर, मासिक धर्म के दौरान एक महिला एक हि अंडो को ओव्यूलेट करती है, लेकिन उपचार प्रक्रिया के लिए अधिक परिपक्व अंडो की जरूरत होती है। ऐसे में अधिक अंडो के उत्पादन और ओव्यूलेशन के लिए प्रजनन दवाओं के मदद से डिम्बग्रंथि को उत्तेजित किया जाता है।

अंडे पुनर्प्राप्ति(Egg Retrieval) – जब फॉलिकल्स बढ़कर परिपक्व अंडे बन चुके हैं, तो बारी आती है अंडो को प्राप्त करना। इसमें अंडो को शरीर से बाहर निकाला जाता है, और उन अंडो को चुना जाता है जो परिपक्व हो। अंडो को पुनः प्राप्त करने के लिए फॉलिक्युलर एस्पिरेशन नामक एक छोटी शल्य प्रक्रिया से की जाती है। अंडाशय से अंडे कलेक्ट करने के लिए योनि की दीवार के माध्यम से एक पतली सुई डाली जाती है और अल्ट्रासाउंड द्वारा निर्देशित किया जाता है।

निषेचन(Fertilization) – अंडो को प्राप्त करने के बाद और पुरूष पार्टनर से शुक्राणु को संग्रहीत करते हैं। दोनों को प्राप्त करने के बाद लैब में निषेचन की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है, अंडो और शुक्राणु को मिक्स करके निषेचन की प्रक्रिया को किया जाता है। निषेचन स्वाभाविक रूप से, या अधिक नियंत्रित प्रक्रिया के माध्यम से हो सकता है जिसे इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) के रूप में जाना जाता है, जहां एक शुक्राणु को सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है ।

भ्रूण संवर्धन(Embryo Culture) – भ्रूण को तैयार होने के बाद सबसे अहम हो जाता है कि भ्रूण के व्यवहार्य को जांचा जाता है। अगर किसी भ्रूण में किसी तरह की कमी पाई जाती है तो फिर दूसरे भ्रूण को चुना जा सकता है। आपको बता दें कि भ्रूण का व्यवहार्य सामान्य नहीं होता है, तो वो किसी का काम का नहीं होता है।

भ्रूण स्थानांतरण और गर्भावस्था(Embryo Transfer and Pregnancy) – भ्रूण के व्यवहार्य की जांच होने के बाद बारी आती सबसे आखीरी और अहम चरण की – भ्रूण स्थानांतरण। गर्भावस्था को मुमकिन बनाने के लिए जरूरी होता है कि भ्रूण के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाए। इससे पहले गर्भाशय के वातावरण को भी जांचा जाता है, और उसे भ्रूण के लायक बनाया जाता है। भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है, और उम्मीद किया जाता है कि भ्रूण अपने शैल से बाहर निकलकर गर्भाशय की दीवार के साथ प्रत्यारोपित होगा।

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद डॉक्टर कपल्स को 10-14 दिन इतंजार करने के लिए बोलते हैं, और इस दो सप्ताह के अवधि के बाद कपल्स प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकते हैं। भ्रूण को अपने शैल से बाहर निकलकर गर्भाशय की दीवार के साथ प्रत्यारोपित होने में दो सप्ताह का समय लगता है।

आईवीएफ किनके लिए लाभान्वित हो सकता है(Who may benefit from IVF?)

आमतौर पर, आईवीएफ उपचार का लाभ हरेक कपल्स और सिंगल महिलाएं ले सकती है। लेकिन जब होती है कि इसके मानदंड कि तो इसमें कुछ चुनींदा स्थितियों को रखा गया है। स्थितियां जैसे – अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त फैलोपियन ट्यूब, पुरुष कारक बांझपन, अस्पष्टीकृत बांझपन, उन्नत मातृ आयु और आनुवंशिक विकार।

दिल्ली में शीर्ष 5 आईवीएफ केंद्र(Top 5 IVF Centre in Delhi)  के मुताबिक यह सभी तरह के विकार बांझपन की स्थिति को पैदा करने का कारण बनते हैं, अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त फैलोपियन ट्यूब के कारण शुक्राणु अंडाशय तक का सफर नहीं कर पाता है, और ऐसे स्थिति में निषेचन एक सवाल बन जाता है। पुरुष बांझपन की स्थिति का एक ही कारण होता है – शुक्राणु संबंधी समस्या। अधिक उम्र में मां बनने की इच्छा त्याग मांगती है, और उन्नत आयु में मातृत्व को प्राप्त करना अग्निपरिक्षा से कम नहीं होता है।

निष्कर्ष(Conclusion)

आईवीएफ प्रजनन उपचार से पैदा हुए बच्चों को ही टेस्ट-ट्यूब बेबी कहा जाता है, आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन – इन विट्रो का मतलब होता है ग्लास से बना हुआ टेस्ट-ट्यूब, और फर्टिलाइजेशन का मतलब होता है निषेचन। और यही कारण है कि आईवीएफ को टेस्ट-ट्यूब बेबी के नाम से भी जाना जाता है। आईवीएफ की प्रक्रिया ही टेस्ट-ट्यूब बेबी की भी प्रक्रिया होती है, लेकिन आईवीएफ को लेकर एक अफवाह है कि दिल्ली में आईवीएफ लागत (IVF Cost in Delhi) महंगा है। हालांकि, दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ आईवीएफ सेंटर (Best IVF center in Delhi) के अनुसार यह एक महज अफवाह है।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र.1. आईवीएफ में टेस्ट-ट्यूब बेबी का क्या मतलब है?

उत्तर – दरअसल, आईवीएफ उपचार से पैदा हुए बच्चों को ही टेस्ट-ट्यूब बेबी का संज्ञान दिया गया है। आईवीएफ शब्द को समझने कि कोशिश करते हैं तो हमें पता चलता है कि टेस्ट-ट्यूब में निषेचन के द्वारा पैदा भ्रूण। जो संतानप्राप्ती के लिए सबसे अहम होता है।

प्र.2. क्या टेस्ट ट्यूब बेबी सफल है?

उत्तर- टेस्ट-ट्यूब बेबी काफी हद तक सफल है, और इस उपचार का असल नाम आईवीएफ है। बांझपन के ज्यादातर मामलों में आईवीएफ उपचार विकल्प को ही चुना जाता है, और इसका कारण सालों से बांझ कपल्स के संतानप्राप्ती को सकार करना।   

प्र.3. टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए कौन-सी उम्र सर्वोत्तम है?

उत्तर – आमतौर पर, आईवीएफ उपचार के लिए कपल्स समस्या को जानने या निसंतानता के साथ सालों बिताने के बाद चुनते हैं, लेकिन बात करें उचित उम्र की तो 25 से लेकर 35 तक की महिलाएं आईवीएफ उपचार को चुन सकती हैं। और आपको बता दें कि प्रजनन उपचार के मामले में उम्र एक अहम फैक्टर होता है।         

प्र.4. गर्भावस्था के लिए कौन सा अंडाशय सर्वोत्तम है?  

उत्तर – गर्भावस्था के लिए दायां अंडाशय आमतौर पर बाएं अंडाशय की तुलना में बेहतर परफॉर्म करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दाएं अंडाशय से निकलने वाले अंडाणु से गर्भधारण की संभावना अधिक होती है।   

प्र.5. आईयूआई या आईवीएफ में से कौन सा अधिक दर्दनाक है?

उत्तर – आईयूआई या आईवीएफ के बीच सबसे ज्यादा दर्दनाक आईवीएफ ही होता है। इस उपचार विकल्प के दौरान एक तय समय के लिए आपको रोजाना इंजेक्शन लगाया जाता है, और भ्रूण को स्थानांतरित करने के लिए कैथेटर का इस्तेमाल। इस तरह की प्रक्रिया आईवीएफ को आक्रमक बनाती है।

Baby Joy
Writer has 15 years of experience in Pharmaceuticals and Health care industries, with expertise in Patient counselling and Digital Media Strategy. She is HOD of Patient counselling Dept. at Baby Joy Fertility and IVF Center.
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