Sperm Washing क्या है? प्रक्रिया, फायदे और IVF Centre in Delhi

What is Sperm Washing? कैसे और कब होता है

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स्पर्म वाशिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जो दिल्ली के IVF केंद्रों ( IVF Centre In Delhi ) में की जाती है! और इसे IVF और IUI के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है! इसका  प्रयोग  स्पर्म को सीमेन ( semen ) से अलग करने के लिए किया जाता है! और इसमें सबसे स्वस्थ, गतिशील और जीवित स्पर्म को चुना जाता है! जो निषेचन के लिए उपयोग में लाये जाते है !

आइये तो आगे जानते है की स्पर्म वाशिंग क्यों ज़रूरी है और इसको करने के क्या-क्या लाभ है! 

चलिए जानते है की स्पर्म वाशिंग कैसे की जाती है और इसको करना क्यों ज़रूरी है 

1. लगभग 20 से 40 मिनट में स्पर्म वाशिंग हो जाती है 

2. IVF और IUI के लिए स्पर्म वाशिंग का इस्तेमाल किया जाता है 

3.  एंटीबायोटिक्स और प्रोटीन सप्लीमेंट्स युक्त स्पर्म वाश घोल को सीमेन में मिलाया जाता है। 

4. अपकेन्द्रीकरण ( सेंट्रीफ्यूजेशन/centrifugation) के बाद, वीर्य द्रव निकाल दिया जाता है और सांद्रित शुक्राणु कोशिकाएँ गर्भाधान के लिए तैयार हो जाती हैं। 

स्पर्म वाशिंग कब की जाती है:

स्पर्म वाशिंग को IVF केंद्रों ( IVF Centre ) में  करने के एक या दो कारण नहीं बल्कि बहुत से कारण है जिनको जानना आपके लिए ज़रूरी है!

1. जब एक महिला प्रेग्नेंट नहीं हो पाती तब IVF का इस्तेमाल किया जाता है!  जिसकी सहायता से गर्वधारण में आसानी रहती है 

2. जब स्पर्म और अंडे को निषेचित किया जाता है तब भी स्पर्म वाशिंग का इस्तेमाल किया जाता है 

3. बांझपन के कारण भी, स्पर्म वाशिंग का उपयोग किया जाता है 

स्पर्म वाशिंग एक प्रभावी और सुरक्षित प्रक्रिया है जो फर्टिलिटी सक्सेस रेट को बढ़ाता है लेकिन इसके साथ साथ यह जानना भी ज़रूरी है की स्पर्म वाशिंग हर मामले में काम नहीं आ सकती और यह पुरुष की उम्र पर भी निर्भर करता है! 

दिल्ली में स्पर्म वाशिंग के लिए सबसे अच्छा और किफायती IVF केंद्र 

वैसे तो दिल्ली में कई IVF केंद्र ( IVF Centre in Delhi ) स्पर्म वाशिंग की सुविधा प्रदान करवाते है पर बेबी जॉय आपको सबसे उच्तम और अच्छी सुविधा का विश्वास दिलाता है जिसकी वजह से,यहां पर आने वाले कई परिवार ख़ुशी ख़ुशी अपने घर जाते है बिना किसी निराशा के!

दिल्ली के IVF केंद्रों ( IVF Centre in Delhi ) में लगभग 20,000 से 30,000 के अंदर स्पर्म वाशिंग हो जाती है, इसके साथ-साथ यह आपको एक अच्छा पर्यावरण भी प्रदान करवाते है!

स्पर्म वाशिंग 3 प्रकार से IVF केंद्रों में  की जाती है 

1. बेसिक स्पर्म वाश 

इस तकनीक को तनुकरण और अपकेंद्रण के लिए इस्तेमाल किया जाता है 

2. धन्तव प्रवणता अपकेंद्रण 

इस तकनीक का इस्तेमाल स्पर्म ( शुक्राणु ) उनके गुरुत्व से अलग करने के लिए किया जाता है 

3. स्विम-अप तकनीक 

स्विम-अप तकनीक एक ऐसा तरीका है जिसका उपयोग शुक्राणुओं ( sperms ) को अलग करने और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने के लिए किया जाता है

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निष्कर्ष:

Sperm Washing एक महत्वपूर्ण लैब प्रक्रिया है जो IVF और IUI जैसी तकनीकों में स्वस्थ शुक्राणु चयन के लिए की जाती है। यह तकनीक न सिर्फ प्रजनन की सफलता बढ़ाती है, बल्कि संक्रमण के जोखिम को भी कम करती है। यदि आप दिल्ली में IVF (IVF Centre in Delhi ) का विकल्प तलाश रहे हैं, तो आधुनिक तकनीक और योग्य विशेषज्ञों के साथ sperm washing जैसे एडवांस्ड प्रोसेस उपलब्ध हैं। दिल्ली में IVF की लागत ( IVF Cost In Delhi ) क्लिनिक की सुविधाओं पर निर्भर करती है, परंतु सफलता दर भी उतनी ही अहम है। 

FAQ’s 

क्या स्पर्म धोने से प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ जाती है?

यह बिलकुल सही है की स्पर्म वाशिंग से प्रेगनेंसी की सम्भावना बढ़ जाती है क्यूंकि यह सबसे गतिशील और सबसे उच्तम स्पर्म को चुनता है जिससे प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ जाती है 

क्या स्पर्म धोना जरूरी है?

स्पर्म वाशिंग से निषेचन की सम्भावना बेहतर ढंग से बढ़ जाती है और यह एक सही स्पर्म को खोजने में भी सहायता करता है स्पर्म वाशिंग बाँझपन उपचार में एक महत्वपूण भूमिका निभाता है 

क्या स्पर्म वाशिंग HIV पोस्टिव कपल्स के लिए भी लाभदायक है?

यह HIV पुरुषों के लिए भी उपयोग किया जाता है, इसके द्वारा HIV पुरुष संतान को पा सकते है 

क्या हर IVF cycle में स्पर्म वाशिंग का इस्तेमाल किया जाता है 

नहीं, यह केवल कुछ ही परिस्थिति में इस्तेमाल की जाती है, यह सिर्फ इन्ही परिस्थिति में इस्तेमाल किया जाता है जब  गुणवत्ता की समस्या हो या साफ-सुथरे शुक्राणु की जरूरत हो, तब यह उपयोगी होता है।

 स्पर्म वाशिंग से सफलता दर कितनी प्रत िशत बढ़ जाती है 

यह बिलकुल सही है, की स्पर्म वाशिंग (Sperm Washing) से IUI (Intrauterine Insemination) की सफलता में बढ़ोतरी तो होती है, लेकिन यह वृद्धि कितनी प्रतिशत होगी, यह कई कारकों पर आधारित है, जैसे कि महिला की उम्र, शुक्राणु की गुणवत्ता, और अन्य प्रजनन संबंधी समस्याएं

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